लाल सागर (Red Sea) और बाब अल-मंदेब (Bab al-Mandeb) जलडमरूमध्य क्षेत्र में भू-राजनीतिक संकट चरम पर पहुंच गया है। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार (Presidential Leadership Council) के अध्यक्ष रशाद अल-अलिमी (Rashad al-Alimi) द्वारा हूती विद्रोहियों के खात्मे की अपील और 20 जुलाई से तेल निर्यात फिर से शुरू करने की घोषणा के बाद स्थिति बेहद संवेदनशील हो गई है।
इसके जवाब में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी (Maritime Embargo) की घोषणा कर दी है, जिससे लाल सागर के महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर जहाजों की आवाजाही पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है।
ग्लोबल ऑयल सप्लाई और कीमतों पर क्या होगा असर?
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बाब अल-मंदेब की सामरिक महत्ता और जोखिम:
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वैश्विक आपूर्ति का बड़ा केंद्र: बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर का दक्षिणी प्रवेश द्वार है, जहां से दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 7% हिस्सा रोजाना गुजरता है।
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ईंधन जहाजों को लंबा रास्ता चुनने की मजबूरी: हूतियों के खतरों के कारण टैंकरों और मालवाहक जहाजों को स्वेज नहर का छोटा रास्ता छोड़कर अफ्रीका के 'केप ऑफ गुड होप' (Cape of Good Hope) से होकर लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। इससे यात्रा समय में 10 से 14 दिनों की बढ़ोतरी और भारी ईंधन खर्च जुड़ रहा है।
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कच्चे तेल की कीमतों में उछाल (Surge in Crude Oil Prices):
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होर्मुज और लाल सागर दोनों रास्तों पर एक साथ तनाव के चलते वैश्विक बाजार में आपूर्ति बाधित होने का डर (Supply Disruption) पैदा हो गया है।
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इसके प्रभाव से अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) के भाव में तेजी देखी जा रही है, जो पहले ही $88–$90 प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है।
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शिपिंग कॉस्ट और इंश्योरेंस में भारी बढ़ोतरी:
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यमन के तेल निर्यात की सुरक्षा पर अनिश्चितता: