पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में पाकिस्तान सेना और प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों के कथित संबंधों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। दावा किया जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर समर्थन मजबूत करने और लोगों के बीच अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कार्यक्रमों में ऐसे चेहरों को मंच दिया जा रहा है।
हालांकि, इन दावों को लेकर सावधानी जरूरी है। उपलब्ध स्वतंत्र स्रोतों में हर आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। खास तौर पर किसी कार्यक्रम में पाकिस्तान सेना की प्रत्यक्ष भूमिका और कथित आतंकी नेटवर्क के बीच संबंध को स्थापित करने के लिए अधिक ठोस और स्वतंत्र प्रमाण की जरूरत होगी।
नीलम घाटी के कार्यक्रम में कथित तौर पर आतंकी चेहरा
इसी कड़ी में PoJK की नीलम घाटी में हुए एक कार्यक्रम को लेकर दावा सामने आया है कि मजहर सईद शाह ने लोगों को संबोधित किया। उन्हें कुछ रिपोर्टों में जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े पूर्व उग्रवादी के तौर पर वर्णित किया गया है। हालांकि, उनकी मौजूदा राजनीतिक पहचान भी है और वह अतीत में आजाद जम्मू-कश्मीर की विधानसभा के सदस्य तथा सूचना मंत्री रह चुके हैं।
मजहर सईद शाह का नाम पहले भी JeM से कथित संबंधों को लेकर विवादों में रहा है। 2021 में पाकिस्तान के राजनीतिक विपक्ष ने भी उन पर JeM से संबंध होने के आरोप लगाए थे। उस समय उनके कथित संबंधों को लेकर आधिकारिक स्तर पर स्पष्ट पुष्टि नहीं हुई थी और उन्होंने भी आरोपों को स्वीकार नहीं किया था।
पाकिस्तान सेना पर क्यों लग रहे हैं आरोप?
PoJK में पाकिस्तान की सैन्य भूमिका लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रही है। आलोचकों और स्थानीय प्रदर्शनकारियों का आरोप रहा है कि सुरक्षा प्रतिष्ठान क्षेत्र की राजनीति और प्रशासन में प्रभाव रखता है। हाल के विरोध प्रदर्शनों के दौरान भी प्रदर्शनकारियों ने सैन्य और खुफिया एजेंसियों के राजनीतिक प्रभाव पर सवाल उठाए हैं