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"हिंदी को सिर्फ कहने की नहीं आत्मसात करने की है जरूरत" - डॉ. अंशु सिंह


​​​​​​वाराणसी। बड़ा लालपुर स्थित जीवनदीप महाविद्यालय में हिंदी दिवस के अवसर पर महाविद्यालय के समिति कक्ष में शिक्षा संकाय की ओर से एक दिवसीय गोष्ठी का आयोजन किया गया ।
 
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग वाराणसी मंडल  डॉ. अंशु सिंह ने भाषा के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत में प्राचीन काल में संचार व्यवस्था भाषा पर ही केंद्रित थी भाषा से ही संस्कृति को पहचाना जाता है जब इच्छा शक्ति भाषा के खिलाफ हो तो वह ना संस्कृति का और ना ही धर्म की पहचान कर सकती है।निश्चित रूप से अंग्रेजी को विकास श्वेता से जोड़कर देखा जाने लगा है लेकिन हमें अपनी जड़ों को भी याद रखने की जरूरत है और हिंदी हमारी वही जड़ है।

इसी क्रम में विशिष्ट अतिथि हिंदी प्रवक्ता ज्ञानोदय बालिका इंटर कॉलेज श्रीमती कंचन त्रिपाठी ने कहा कि हिंदी दुनिया में बोली जाने वाली भाषाओं में तीसरे नंबर पर है दुनिया के लगभग 55 करोड लोग इस भाषा को समझते हैं तो वहीं भारत के 45 करोड़ लोगों की बातचीत का माध्यम हिंदी भाषा है। इस मौके पर शैलेश त्रिवेदी संबद्धता निदेशक ने कहा कि गांधीजी में हिंदी भाषा को जनमानस की भाषा भी कहा है हिंदी को 14 सितंबर 1949 को राजभाषा मनाया गया हिंदी हमारी अपनी मातृभाषा है।उन्होंने उपस्थित छात्रों से मातृभाषा के प्रति अपना प्यार और सम्मान दर्शाने और लोगों को इस भाषा का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर बी.एड. विभाग के विद्यार्थियों द्वारा काव्य गोष्ठी,नाट्य मंचन, व हिंदी संगीत की प्रस्तुति दी। 

कार्यक्रम का संचालन डॉ. वीणा पाण्डेय व अतिथियों का स्वागत डॉ. नंदा द्विवेदी ने किया। इस अवसर पर डॉ.पायल, डॉ रूपम पाठक, डॉ. जहां आरा, डॉ. राजेश कुमार यादव, डॉ. कल्पना चतुर्वेदी,अलका सिंह, प्रार्थना सिंह, पप्पू कुमार, जितेंद्र कुमार सिंह, रंजना सिंह, जंग बहादुर पाल आदि उपस्थित रहे।

Posted On:Tuesday, September 14, 2021


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