दुनिया की सबसे लोकप्रिय क्रिकेट लीग, आईपीएल 2026 (IPL 2026) इस साल चौकों-छक्कों के साथ-साथ एक बेहद चिंताजनक वजह से सुर्खियों में है। इस सीजन को क्रिकेट पंडित ‘फील्डिंग महामारी’ का नाम दे रहे हैं। आक्रामक बल्लेबाजी और शानदार गेंदबाजी के लिए मशहूर इस टूर्नामेंट में पिछले कुछ सालों से फील्डिंग का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। इस सीजन में फील्डर्स के हाथों से लगातार कैच छूट रहे हैं, रन आउट मिस हो रहे हैं और मिसफील्ड्स की संख्या ने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
मिसफील्ड और छूटे कैचों के डरावने आंकड़े आईपीएल 2026 में सिर्फ 65 मैचों के भीतर ही 508 मिसफील्ड्स देखने को मिल चुकी हैं, जो पिछले किसी भी सीजन से काफी ज्यादा हैं। तुलनात्मक रूप से देखें तो साल 2025 में यह आंकड़ा 471, 2024 में 235 और 2023 में मात्र 267 था। यानी बीते कुछ सालों में मिसफील्ड्स की संख्या लगभग दोगुनी हो चुकी है।
कैच छोड़ने के मामले में भी फील्डर्स काफी दरियादिली दिखा रहे हैं। इस सीजन में अब तक 169 कैच टपकाए जा चुके हैं, जबकि अभी कई महत्वपूर्ण मुकाबले खेले जाने बाकी हैं। इसके अलावा, रन आउट के मौकों को भुनाने में भी टीमें नाकाम रही हैं। इस सीजन में अब तक रन आउट के 276 मौके गंवाए जा चुके हैं, जो कि टीमों की खराब ग्राउंड फील्डिंग और आपसी तालमेल की कमी को दर्शाता है।
क्यों आ रही है फील्डिंग में इतनी गिरावट? विशेषज्ञों के अनुसार, फील्डिंग का स्तर गिरने के पीछे कई बड़े कारण हैं:
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तेज गति और पावर-हिटिंग: आधुनिक बल्लों की तकनीक और फ्लैट पिचों के कारण बल्लेबाज अब हर गेंद पर बड़े शॉट खेलते हैं। इससे गेंद इतनी तेज गति से फील्डर की तरफ आती है कि उन्हें रिएक्ट करने का समय नहीं मिलता।
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व्यस्त शेड्यूल और थकान: बैक-टू-बैक मैच, लगातार यात्रा और रिकवरी के लिए कम समय मिलने के कारण खिलाड़ी मानसिक और शारीरिक रूप से थक जाते हैं, जिसका असर उनकी फील्डिंग पर दिखता है।
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युवा खिलाड़ियों का कम अनुभव: कई फ्रेंचाइजी अब युवा घरेलू खिलाड़ियों पर दांव लगा रही हैं। इन खिलाड़ियों में प्रतिभा तो है, लेकिन फ्लड लाइट्स (अंडर लाइट्स) के नीचे दबाव में कैच पकड़ने का उनका अनुभव काफी कम