‘रामायण’ के रावण यानी यश ने बेंगलुरु में कुछ ऐसा कहा, जिसकी चर्चा अब हर तरफ हो रही है। 15 अक्टूबर को फिल्म के प्रमोशनल इवेंट में यश ने दर्शकों से साफ कहा कि आपसी मतभेद छोड़कर भारतीय सिनेमा का साथ देना चाहिए। उन्होंने खास तौर पर कन्नड़ और दक्षिण भारत के दर्शकों से ‘रामायण’ को एक मौका देने की अपील की। यश का मानना है कि जब पूरा देश अपनी फिल्मों के साथ खड़ा होगा, तभी भारतीय सिनेमा दुनिया में अपना दम दिखा पाएगा।
यश ने क्षेत्रीय मतभेदों पर बात करते हुए कहा, “अगर हम आपस में ही लड़ते रहे, जैसे ‘बांटो और राज करो’ वाली स्थिति रही, तो हम कभी भी दुनिया को चुनौती नहीं दे पाएंगे।” उनका कहना था कि फिल्में किसी एक भाषा या इलाके की नहीं होतीं। अच्छी कहानी और मेहनत को हर जगह सम्मान मिलना चाहिए। अगर भारतीय दर्शक एक-दूसरे की फिल्मों को सपोर्ट करेंगे, तो देश की फिल्म इंडस्ट्री की ताकत और बढ़ेगी। यश का यह संदेश ऐसे समय आया है, जब बड़े बजट की फिल्मों को लेकर अलग-अलग भाषाओं के दर्शकों के बीच खूब चर्चा होती है।
फिल्म के बारे में बात करते हुए यश ने कहा कि हम सभी भगवान राम की कहानियां सुनते हुए बड़े हुए हैं, लेकिन अब उन्हें बड़े पर्दे पर जीवंत होते देखना एक अलग अनुभव होगा। उन्होंने दर्शकों से ‘रामायण’ जरूर देखने की अपील करते हुए कहा, “हम सभी कहानियां सुनते हुए बड़े हुए हैं, लेकिन इन कहानियों को आंखों के सामने सच होते देखने के लिए, आपको यह ‘रामायण’ जरूर देखनी चाहिए।” यश ने यह भी कहा कि अगर फिल्म बनाने के पीछे इरादा नेक है, तो लोगों को आगे आकर उसका समर्थन करना चाहिए।
यश ने इस दौरान भगवान राम की भूमिका निभा रहे रणबीर कपूर की भी दिल खोलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि एक अभिनेता के तौर पर उन्होंने रणबीर को इस किरदार के लिए पूरी तरह समर्पित होते देखा है। यश ने कहा, “एक अभिनेता के तौर पर मैंने देखा है कि रणबीर ने खुद को पूरी तरह से इस किरदार में समर्पित कर दिया है। भगवान का आशीर्वाद हमेशा उन पर बना रहे।” रावण का किरदार निभाने वाले यश की ओर से रणबीर के लिए आई यह तारीफ फिल्म को लेकर उत्साह और बढ़ाती है।
नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही ‘रामायण’ में रणबीर कपूर भगवान राम और यश रावण के किरदार में नजर आएंगे। फिल्म 5 नवंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। अब देखना होगा कि बड़े पर्दे पर राम और रावण की यह कहानी दर्शकों को कितना प्रभावित करती है। फिलहाल, यश का संदेश साफ है—भाषा और क्षेत्र की लड़ाई से ऊपर उठिए, अच्छी फिल्मों का साथ दीजिए और भारतीय सिनेमा को दुनिया में आगे बढ़ाइए!