कर्नाटक की सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी में जारी अंदरूनी कलह पर लगाम लगाने के लिए आज शनिवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री के सरकारी आवास 'कावेरी' पर नाश्ते पर मुलाकात की। नाश्ते के बाद दोनों शीर्ष नेताओं के बीच एक घंटे तक बैठक चली।
दिल्ली में पार्टी आलाकमान से मिले स्पष्ट निर्देश के बाद हुई इस मुलाकात के बाद दोनों नेता एक साथ सामने आए और खुले तौर पर मतभेदों के खत्म होने का दावा किया। सिद्धारमैया ने दो टूक कहा कि "हमारे बीच कोई मतभेद नहीं हैं और आगे भी नहीं होगा।" वहीं, शिवकुमार ने भी कहा कि "हम एक साथ चलेंगे"। सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री पद की चाह रखने वाले डीके शिवकुमार के तेवर अब नरम पड़ गए हैं और कर्नाटक का राजनीतिक नाटक खत्म हो गया है?
मेन्यू में इडली-वड़ा, एजेंडा में राजनीतिक एकता
शनिवार सुबह करीब 10 बजे डीके शिवकुमार, सिद्धारमैया के आवास 'कावेरी' पहुंचे। इस मुलाकात के दौरान की शुरुआती तस्वीरों में मुख्यमंत्री के कानूनी सलाहकार एएस पोन्नाना भी मौजूद थे।
नाश्ते का मेन्यू: CMO सूत्रों के अनुसार, बहुचर्चित नाश्ते में दक्षिण भारतीय व्यंजन जैसे इडली, वड़ा, सांभर, चटनी और उप्पिट्टू (उपमा) शामिल थे। हालांकि, सिद्धारमैया ने बाद में स्पष्ट किया कि नाश्ते के दौरान कोई राजनीतिक बातचीत नहीं हुई।
जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस: अब कोई मतभेद नहीं
नाश्ते के बाद दोनों नेताओं ने एक जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की। यह कॉन्फ्रेंस राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार के शुरुआती 2.5 साल पूरे होने पर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर मचे अंदरूनी विवाद को खत्म करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी।
विपक्षी पार्टी BJP ने चेतावनी दी थी कि अगर सत्ता की यह खींचतान जारी रही तो वह सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाएगी।
सिद्धारमैया का बयान:
"मैंने शिवकुमार के साथ बैठक की, क्योंकि कुछ अनचाहा कन्फ्यूजन पैदा हो गया था जिसे मीडिया ने पैदा किया था। अब हमारे बीच कोई मतभेद नहीं हैं। आज भी कोई मतभेद नहीं हैं, भविष्य में भी मतभेद नहीं होंगे। मैं यह पक्का करूंगा कि अब से ऐसा कोई मतभेद न हो।"
डीके शिवकुमार का बयान: प्रदेश अध्यक्ष शिवकुमार ने भी मतभेदों को खारिज करते हुए आलाकमान के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई:
"लोगों ने कांग्रेस पार्टी का साथ दिया और उसे सत्ता में लाए। इसलिए, कांग्रेस को उनकी उम्मीदों पर खरा उतरना होगा। हमारे बीच कोई गुटबाजी नहीं है। हम साथ चलेंगे, सबको साथ लेकर चलेंगे और पार्टी आलाकमान की बात भी मानेंगे।"
उन्होंने यह भी साफ किया कि पार्टी 2028 का विधानसभा चुनाव मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के नेतृत्व में लड़ेगी। शिवकुमार ने कहा कि वे 2023 की चुनावी जीत की तरह 2028 में भी इसे दोहराएंगे।
सोशल मीडिया पर साझा की तस्वीरें
प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले, दोनों नेताओं ने सोशल मीडिया पर मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि उनकी अच्छी बातचीत हुई है, जिससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि पार्टी में सब कुछ ठीक है।
आलाकमान के निर्देश के बाद नाश्ते के टेबल पर हुई यह मुलाकात, और उसके बाद मतभेद खत्म होने की घोषणा, निश्चित रूप से दिल्ली में पार्टी नेतृत्व के लिए राहत की बात होगी। अब देखना यह है कि डीके शिवकुमार का अगला कदम क्या होता है और क्या यह 'ब्रेकफास्ट डिप्लोमेसी' कर्नाटक की राजनीतिक स्थिरता को लंबे समय तक बनाए रख पाएगी।