अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ युद्ध खत्म होने और शांति समझौते के करीब पहुंचने के ऐतिहासिक ऐलान के बाद वैश्विक और भारतीय बाजारों में जबरदस्त उत्साह देखा गया। शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) के दोनों प्रमुख सूचकांक—सेंसेक्स और निफ्टी—रॉकेट की रफ्तार से भागे। सेंसेक्स करीब 1,700 अंकों की भारी-भरकम बढ़त के साथ बंद हुआ। इस बंपर तेजी के पीछे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई करीब 4 फीसदी की भारी गिरावट मुख्य वजह रही।
तेल कंपनियों के शेयरों में लगी आग (OMCs Up)
कच्चे तेल की कीमतें गिरने से भारत की सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) की लागत में बड़ी कमी आएगी, जिसके चलते इनके शेयरों में निवेशकों ने जमकर खरीदारी की:
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HPCL: हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के शेयर 6.30 फीसदी की उछाल के साथ बंद हुए।
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BPCL: भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के शेयरों में 5.54 फीसदी की तेजी दर्ज की गई।
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IOC: इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के शेयर भी 4.91 फीसदी मजबूत हुए।
ब्रेंट क्रूड $90 के नीचे; इन सेक्टरों में भी आई बहार
ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमत 3.98 फीसदी गिरकर 86.78 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। तेल सस्ता होने का सीधा फायदा एविएशन (विमानन) और पेंट जैसे उद्योगों को मिलता है, क्योंकि कच्चा तेल इनका मुख्य कच्चा माल (Raw Material) या फ्यूल है:
1. एविएशन सेक्टर (Aviation Shares):
2. पेंट कंपनियां (Paint Shares):
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इंडिगो पेंट्स: 4.64 फीसदी की बढ़त।
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शालीमार पेंट्स: 2.33 फीसदी की मजबूती।
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एशियन पेंट्स: 2.06 फीसदी का उछाल।
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बर्जर पेंट्स: 0.05 फीसदी की हल्की बढ़त।
ट्रंप का बड़ा बयान: 'हमने ईरान के साथ युद्ध खत्म कर दिया'
बाजार में आई इस सुनामी जैसी तेजी की मुख्य पटकथा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान से लिखी गई, जिसमें उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से जारी सैन्य गतिरोध को समाप्त करने की घोषणा की।
डोनाल्ड ट्रंप का आधिकारिक दावा: "मुझे नहीं पता कि आपने अभी तक सुना या नहीं, लेकिन हमने ईरान के साथ युद्ध खत्म कर दिया है। वे इस बात पर पूरी तरह सहमत हो गए हैं कि वे कभी भी परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) नहीं बनाएंगे। यही हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता थी। यह समझौता लगभग तैयार है और उम्मीद है कि इस वीकेंड (शनिवार/रविवार) यूरोप में एक आधिकारिक समारोह में इस पर हस्ताक्षर हो सकते हैं, जिसमें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे. डी. वेंस (J. D. Vance) भी शामिल होंगे।"
ट्रंप ने इससे पहले ईरान के तेल उद्योग पर कब्जा करने की सख्त चेतावनी दी थी, लेकिन बाद में उन्होंने इस्लामिक रिपब्लिक पर की जाने वाली बड़ी सैन्य कार्रवाई (Air Strikes) की योजना को पूरी तरह रद्द कर दिया।
भारत के लिए 'मास्टरस्ट्रोक' है तेल का सस्ता होना
रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के रिसर्च एसवीपी अजीत मिश्रा और लाइवलॉन्ग वेल्थ के फाउंडर हरिप्रसाद के. के मुताबिक, भारत के नजरिए से यह शांति समझौता और कच्चे तेल की गिरावट एक संजीवनी की तरह है:
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होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का जोखिम कम: ईरान के साथ तनाव घटने से होर्मुज स्ट्रेट से वैश्विक तेल सप्लाई बाधित होने का खतरा टल गया है, जिससे सप्लाई चेन फिर बहाल हो जाएगी।
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आयात बिल में भारी कटौती: भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। तेल की कीमतें घटने से देश का विदेशी मुद्रा भंडार बचेगा और आयात लागत (Import Cost) घटेगी।
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महंगाई पर ब्रेक: तेल सस्ता होने से माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स का खर्च कम होता है, जिससे सीधे तौर पर घरेलू बाजार में महंगाई का दबाव कम होगा और देश की आर्थिक स्थिति को नई गति मिलेगी।