बनारस न्यूज डेस्क: वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में सोमवार को रिजल्ट में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में छात्रों ने प्रशासनिक भवन को बंद करा दिया और विश्वविद्यालय की कक्षाएं भी नहीं चलने दीं। छात्र गेट पर बैठकर नारेबाजी करते रहे और रिजल्ट में सुधार के साथ पूरे मामले की जांच की मांग की।
छात्रों का आरोप है कि बीए प्रथम वर्ष के रिजल्ट में कई छात्रों को बिना वजह फेल या अनुपस्थित दिखा दिया गया है। कुछ छात्राओं ने बताया कि उन्हें एक विषय में जीरो नंबर मिले हैं। जब उन्होंने विश्वविद्यालय से इसकी वजह पूछी तो उन्हें बताया गया कि ओएमआर शीट सही तरीके से नहीं भरी गई थी। छात्रों का कहना है कि वे हाईस्कूल से ही ओएमआर शीट पर परीक्षा देते आ रहे हैं, इसलिए इतनी बड़ी संख्या में छात्रों से एक जैसी गलती होने की बात समझ से परे है।
छात्र नेता शिवम यादव ने आरोप लगाया कि काशी विद्यापीठ में पिछले कई वर्षों से रिजल्ट को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। उनका कहना है कि इस बार बीए प्रथम वर्ष के परिणाम में बड़ी संख्या में विसंगतियां हैं। उन्होंने दावा किया कि बीए प्रथम वर्ष का रिजल्ट करीब डेढ़ साल बाद जारी किया गया, लेकिन इतनी लंबी प्रक्रिया के बाद भी परिणाम में गलतियां सामने आ रही हैं।
शिवम यादव ने विश्वविद्यालय की रिजल्ट तैयार करने वाली एजेंसी के कामकाज पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एजेंसी पिछले करीब पांच साल से विश्वविद्यालय के बाहर कार्यालय बनाकर काम कर रही है, जबकि उसका काम विश्वविद्यालय परिसर के अंदर होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले रिजल्ट में सुधार के नाम पर बिचौलियों के जरिए पैसे लिए जाने की शिकायतें थीं और अब परीक्षा नियंत्रक के करीबी लोगों पर इसी तरह की गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लग रहे हैं।
डिग्री में भी गड़बड़ी का आरोप
छात्र नेता ने डिग्री को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि छात्र आवेदन के समय आधार समेत जरूरी दस्तावेज जमा करते हैं, लेकिन बाद में कई बार गलत डिग्री मिलने की शिकायत सामने आती है। इसके बाद सुधार के नाम पर छात्रों से पैसे लिए जाने का आरोप है। छात्रों ने पूरे मामले की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
'गलती हमारी है तो बताएं'
बीए की छात्रा प्रियांशी मिश्रा ने कहा कि उन्हें एक विषय में जीरो नंबर दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ओएमआर भरने में छात्रों से गलती हुई है तो विश्वविद्यालय उन्हें इसकी जानकारी दे, लेकिन अगर गलती जांच प्रक्रिया में हुई है तो प्रशासन को इसे स्वीकार कर सुधार करना चाहिए।
छात्रों का कहना है कि वे दसवीं कक्षा से बोर्ड परीक्षाओं में ओएमआर शीट भरते आ रहे हैं। ऐसे में एक साथ 100 से ज्यादा छात्रों के रिजल्ट में इसी तरह की गड़बड़ी होना गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जल्द समाधान निकालने और रिजल्ट की दोबारा जांच कराने की मांग की है।