राजस्थान की राजधानी जयपुर के सबसे प्रमुख विरोध-प्रदर्शन स्थल शहीद स्मारक पर सोमवार, 15 जून 2026 को उस समय अचानक अफरा-तफरी और भारी बवाल मच गया, जब देशव्यापी डिजिटल और व्यंग्यात्मक छात्र आंदोलन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके पर अज्ञात युवकों ने जानबूझकर सिलसिलेवार शारीरिक हमला कर दिया। विधिक और प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सीजेपी के कार्यकर्ता राज्य और देश में फैली बेरोजगारी, बदहाल शिक्षा व्यवस्था और हालिया राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के कथित पेपर लीक घोटालों के खिलाफ एक शांतिपूर्ण विरोध सभा का आयोजन कर रहे थे। जैसे ही आंदोलन के मुख्य सूत्रधार अभिजीत दीपके कार्यक्रम स्थल के प्रवेश द्वार पर पहुंचे, वहां पहले से घात लगाकर भीड़ में छिपे तीन से चार अज्ञात युवकों ने अचानक आगे बढ़कर उन पर हमला बोल दिया और एक के बाद एक कई जोरदार थप्पड़ जड़ दिए।
इस अप्रत्याशित और हिंसक विखंडन हमले के बाद कार्यक्रम स्थल पर मौजूद सैकड़ों आक्रोशित कार्यकर्ताओं और छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। समर्थकों ने भागने की कोशिश कर रहे हमलावर युवकों को दौड़ाकर मौके पर ही दबोच लिया और उनकी जमकर धुनाई कर दी, जिससे शहीद स्मारक परिसर एक अघोषित युद्धक्षेत्र में तब्दील हो गया। वहां कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात भारी पुलिस बल ने मुस्तैदी दिखाते हुए तुरंत बीच-बचाव किया और उग्र हो चुकी भीड़ के चंगुल से छुड़ाकर चारों आरोपियों को विधिक रूप से अपनी हिरासत में ले लिया। जालूपुरा और कोतवाली थाना पुलिस फिलहाल अज्ञात स्थान पर ले जाकर इन युवकों से सघन विच्छेद पूछताछ कर रही है, हालांकि अभी तक आरोपियों की वास्तविक पहचान और उनके किसी राजनीतिक संगठन से जुड़े होने के रिकॉर्ड को सार्वजनिक नहीं किया गया है।
इस विवादित घटना के बाद एकत्रित युवाओं और छात्रों में गहरा आक्रोश देखा गया, जिसे देखते हुए घायल एक्टिविस्ट अभिजीत दीपके ने सूझबूझ का परिचय देते हुए लाउडस्पीकर से अपने समर्थकों से हर हाल में शांति और कूटनीतिक संयम बनाए रखने की पुरजोर अपील की। गौरतलब है कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' कोई पंजीकृत या वास्तविक राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि मई 2026 में देश के युवाओं द्वारा रोजगार और प्रशासनिक पारदर्शिता की मांग को लेकर मीम्स और तीखे राजनीतिक व्यंग्य के जरिए शुरू किया गया एक व्यापक सोशल मीडिया आंदोलन है। जयपुर से पहले अभिजीत नई दिल्ली के जंतर-मंतर और लखनऊ के इको-गार्डन में भी विशाल रैलियों का विलेख नेतृत्व कर चुके हैं, और उनका आरोप है कि इस तरह के कायरतापूर्ण हमले युवाओं की न्यायसंगत लोकतांत्रिक आवाज को दबाने के लिए सत्तापोषित तत्वों द्वारा प्रायोजित किए जा रहे हैं।