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नियमों का उल्लंघन पड़ा भारी, देश भर की 135 NBFCs पर रिजर्व बैंक की डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक

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Posted On:Thursday, June 11, 2026

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश के गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र (NBFC) पर अपना विनियामक (Regulatory) शिकंजा और कड़ा कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने नियमों की अनदेखी और मानदंडों को पूरा न करने के चलते 135 नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFC) का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (CoR) तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है।

आरबीआई की इस सख्त कार्रवाई की जद में एक्सप्रेस फिनकैप हाउस, अक्षय फिस्कल सर्विसेज, टाइम्स फाइनेंस (P), जुपिटर प्रोजेक्ट्स (P), जुपिटर फिनवेस्ट, एसेल फाइनेंस बिजनेस लोन्स और सिटीवाइड फाइनेंशियल सर्विसेज जैसी कई जानी-मानी कंपनियां शामिल हैं।

पश्चिम बंगाल की कंपनियों पर सबसे ज्यादा गाज

आरबीआई द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, जिन 135 एनबीएफसी का रजिस्ट्रेशन रद्द किया गया है, उनमें से अधिकांश कंपनियों के रजिस्टर्ड कार्यालय पश्चिम बंगाल में स्थित थे। केंद्रीय बैंक लगातार वित्तीय नियमों का उल्लंघन करने वाली और निष्क्रिय पड़ी शेल कंपनियों पर नजर रख रहा है, जिसके तहत यह बड़ी कार्रवाई की गई है। लाइसेंस रद्द होने के बाद अब ये कंपनियां किसी भी तरह का वित्तीय या ऋण (Loan) देने का कारोबार नहीं कर सकेंगी।

13 कंपनियों ने खुद सौंपे अपने लाइसेंस

लाइसेंस रद्द किए जाने की कार्रवाई के अलावा, 13 अन्य नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों ने स्वैच्छिक रूप से (Voluntarily) अपना रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट आरबीआई को सौंप दिया है। इन कंपनियों द्वारा लाइसेंस सरेंडर करने के पीछे निम्नलिखित मुख्य कारण रहे:

  • अपना कारोबार पूरी तरह बंद करना।

  • किसी दूसरी बड़ी कंपनी में विलय (Merger), समामेलन या स्वैच्छिक रूप से नाम हटाना।

  • कानूनी इकाई (Legal Entity) के रूप में अस्तित्व का समाप्त होना।

इन कंपनियों ने छोड़ा NBFI का काम: विज्ञप्ति के मुताबिक, जे. थॉमस फाइनेंस, इकोन-सुपर सेल्स, हितेशा फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट, टिनवेली टुटिकोरिन इन्वेस्टमेंट्स, कार्नेक्स विनिमय और इम्पैक्ट लीजिंग जैसी कंपनियों ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन (NBFI) का कारोबार छोड़ने का फैसला करते हुए अपने लाइसेंस सरेंडर कर दिए।

मानकों में बदलाव भी बना वजह

इस सूची में कुछ कंपनियां ऐसी भी रहीं जिन्हें नियमों में आए बदलाव के कारण अपना लाइसेंस वापस करना पड़ा:

  • फोररनर कैपिटल इन्वेस्टमेंट्स: इस कंपनी का लाइसेंस इसलिए सरेंडर कराया गया क्योंकि यह अब बिना रजिस्ट्रेशन वाली 'कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी' (CIC) के लिए तय नए मानदंडों को पूरा करती थी, जिसके तहत आरबीआई के पास अलग से रजिस्ट्रेशन कराने की आवश्यकता नहीं होती है।

  • अन्य नाम: विज्ञप्ति में आगे बताया गया कि कैस्पियन इम्पैक्ट इन्वेस्टमेंट्स, हरि दर्शन सेल्स, आइवरी कंसल्टेंट्स, SKA कंसल्टेंसी सर्विसेज, त्रिशिता मैनेजमेंट और सुबन ट्रेड्स जैसी कंपनियों के लाइसेंस भी सरेंडर करने वाली सूची में शामिल हैं।

आरबीआई की इस सख्त कार्रवाई से साफ है कि केंद्रीय बैंक वित्तीय बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने और आम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराना चाहता है।


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