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क्रूड ऑयल में भारी गिरावट के बीच घरेलू ईंधन कीमतों पर सस्पेंस: पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा—जल्दबाजी में नहीं घटेंगे दाम, तेल कंपनियों को 'अंडर-रिकवरी' के नुकसान से उबारना पहली प्राथमिकता

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Posted On:Monday, June 15, 2026

अमेरिका और ईरान के बीच बहुप्रतीक्षित शांति समझौते की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट से भारतीय उपभोक्ताओं में पेट्रोल और डीजल के सस्ते होने की उम्मीदें विखंडन रूप से जाग गई हैं। सोमवार, 15 जून 2026 को शुरुआती वैश्विक कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड वायदा (Brent Crude Futures) $4.7\%$ से अधिक लुढ़ककर $83$ डॉलर प्रति बैरल के तीन महीने के निचले स्तर पर आ गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी $5.1\%$ टूटकर $80.53$ डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से नौसैनिक नाकेबंदी हटने की खबरों ने बाजार से 'वॉर प्रीमियम' को पूरी तरह गायब कर दिया है। इसके बावजूद, केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) के उच्च पदस्थ सूत्रों ने विधिक रूप से स्पष्ट किया है कि भारत में आम जनता को खुदरा कीमतों पर राहत मिलने में अभी कुछ हफ्तों का समय लग सकता है।

मंत्रालय के वरिष्ठ विलेख अधिकारियों के मुताबिक, हालिया पश्चिम एशिया संकट के दौरान जब कच्चा तेल $120$ डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया था, तब सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs)—जैसे IOCL, BPCL और HPCL—ने अंतरराष्ट्रीय लागत का पूरा बोझ घरेलू उपभोक्ताओं पर नहीं डाला था और भारी वित्तीय घाटा (Under-Recovery) सहा था। हालांकि, जब घाटा नियंत्रण से बाहर हो गया, तब मई के मध्य से जून के पहले हफ्ते तक पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में ₹7 से ₹8 प्रति लीटर की विच्छेद बढ़ोतरी की गई थी। अधिकारियों का तर्क है कि इस संचित घाटे की भरपाई केवल एक दिन की बाजार गिरावट से मुमकिन नहीं है; जब तक कच्चे तेल की कीमतें $80$ से $85$ डॉलर के दायरे में कम से कम तीन से चार हफ्तों तक विखंडन रूप से स्थिर नहीं हो जातीं, तब तक खुदरा कीमतों में बड़ी कटौती करना कूटनीतिक रूप से जल्दबाजी होगी।

इसके अतिरिक्त, मार्च महीने में केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी ₹3 प्रति लीटर कम करने और डीजल पर इसे घटाकर शून्य करने के बाद केंद्रीय करों के मोर्चे पर तुरंत और राहत देने की विधिक गुंजाइश बेहद सीमित है। हालांकि, देश अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का $85\%$ से अधिक आयात करता है, इसलिए रुपये-डॉलर विनिमय दर में सुधार (जो आज मजबूत होकर 94.65 पर आ गया) और शिपिंग इंश्योरेंस प्रीमियम में कमी से आयात लागत निश्चित रूप से घटेगी। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) के हालिया नीतिगत बयानों का हवाला देते हुए विशेषज्ञों ने अनुमान जताया है कि यदि क्रूड में यह मंदी जुलाई के पहले हफ्ते तक लगातार बनी रहती है, तो तेल कंपनियां अपनी आगामी पाक्षिक समीक्षा में खुदरा उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की दरों में ₹2 से ₹5 प्रति लीटर तक की विलेख राहत देने का बड़ा कदम आगे बढ़ा सकती हैं।


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