बनारस न्यूज डेस्क: वाराणसी के फूलपुर थानाक्षेत्र में मानवता को शर्मसार करने वाली एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। रविवार देर रात अपनी फैक्ट्री से घर लौट रहे 38 वर्षीय कारोबारी मनीष सिंह की कार से अचानक सामने आई एक महिला को हल्की टक्कर लग गई। हादसे के बाद मनीष ने भागने के बजाय इंसानियत दिखाई और कार रोककर घायल महिला की मदद के लिए ग्रामीणों को पुकारा। लेकिन मदद के लिए जुटी भीड़ अचानक हिंसक हो गई और मनीष को संभलने का मौका तक नहीं दिया।
गुस्साए ग्रामीणों ने कारोबारी की एक न सुनी और उनकी कार को ईंट-पत्थरों से चकनाचूर कर दिया। मनीष जान बख्शने की गुहार लगाते रहे और घायल महिला का इलाज खुद कराने की बात कहते रहे, लेकिन भीड़ पर खून सवार था। 10-12 लोगों ने उन्हें घेरकर लात-घूसों और ईंटों से तब तक बेरहमी से पीटा, जब तक कि उनकी सांसे नहीं थम गईं। सड़क पर तड़प-तड़पकर मनीष ने दम तोड़ दिया, जिसके बाद हमलावर मौके से फरार हो गए।
मनीष अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे और उनके पीछे पत्नी सहित दो छोटी बेटियां और 6 महीने का मासूम बेटा है। इस नृशंस हत्या के बाद पूरे इलाके में भारी तनाव व्याप्त है। मृतक के चाचा की तहरीर पर पुलिस ने 8 नामजद और 7 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए घमहापुर गांव को छावनी में तब्दील कर दिया गया है, जहाँ पांच थानों की फोर्स और पीएसी तैनात की गई है।
पुलिस ने अब तक दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य की तलाश में दबिश दी जा रही है। परिजनों ने आरोपियों को फांसी देने की मांग करते हुए शव रखकर प्रदर्शन किया, जिसके बाद आला अधिकारियों ने कड़ी कार्रवाई का आश्वासन देकर उन्हें शांत कराया। मॉब लिंचिंग की इस घटना ने समाज में बढ़ती असहनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहाँ एक व्यक्ति की मदद करने की इच्छा ही उसकी मौत का कारण बन गई।