बनारस न्यूज डेस्क: वाराणसी के नक्खीघाट क्षेत्र स्थित भरतनगर में गुरुवार शाम एक भीषण अग्निकांड हुआ, जिसमें कबाड़ बीनने वाले परिवारों की करीब 25 झोपड़ियां जलकर राख हो गईं। संदिग्ध परिस्थितियों में लगी यह आग इतनी भयावह थी कि इसका काला धुआं शहर में करीब 5 किलोमीटर दूर तक देखा गया, जिससे स्थानीय निवासियों में दहशत फैल गई।
घटना का विवरण:
यह हादसा शाम करीब 4 बजे किशून और विशून यादव की खाली जमीन पर बनी झुग्गी बस्ती में हुआ। आग की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस दौरान बस्ती में रखे 3 से 4 छोटे गैस सिलेंडर धमाके के साथ फट गए। घटना के समय राहत की बात यह रही कि बस्ती के अधिकांश लोग पश्चिम बंगाल स्थित अपने पैतृक गांव गए हुए थे, जिससे एक बड़ा जानी नुकसान टल गया।
राहत और बचाव कार्य:
सूचना मिलते ही दमकल विभाग की 5 गाड़ियां, एनडीआरएफ और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। हालांकि, इलाके की संकरी गलियों ने बचाव कार्य में बड़ी बाधा उत्पन्न की। भारी वाहनों के न पहुँच पाने के कारण छोटी फायर ब्रिगेड गाड़ियों को अंदर भेजा गया। मुख्य अग्निशमन अधिकारी आनंद सिंह राजपूत के नेतृत्व में करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका।
प्रदूषण और दहशत:
आग के कारण भदऊचुंगी से लेकर नदेसर तक आसमान में काला धुआं छा गया। नक्खीघाट के मौजाहाल इलाके में धुएं की सघनता इतनी अधिक थी कि लोगों को सांस लेने में कठिनाई होने लगी और वे मास्क या गमछा बांधकर रहने को मजबूर हुए।
जांच जारी:
थाना प्रभारी उपेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि आग लगने के कारणों की सटीक जानकारी अभी नहीं मिल पाई है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह महज एक हादसा था या इसके पीछे कोई और कारण। बस्ती में रहने वाले कासिम सेख और बुद्धू सेख जैसे पीड़ितों का सारा सामान जलकर खाक हो गया है, जिससे उनके सामने अब रहने और खाने का संकट खड़ा हो गया है।