बनारस न्यूज डेस्क: वाराणसी में काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास और मल्टी मॉडल टर्मिनल परियोजना के बीच गंज शहीदा मस्जिद को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। उत्तर रेलवे ने मस्जिद के बाहर नोटिस चस्पा कर 20 जून 2026 तक रेलवे भूमि से निर्माण हटाने का निर्देश दिया है। रेलवे का दावा है कि स्टेशन के प्रथम प्रवेश द्वार के पास स्थित यह निर्माण रेलवे की जमीन पर है और चल रहे विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न कर रहा है।
रेलवे प्रशासन ने नोटिस में कहा है कि अंजुमन इंतजामिया बनाम यूनियन ऑफ इंडिया से संबंधित एक मामला अदालत में विचाराधीन था, जिसे अगस्त 2024 में खारिज कर दिया गया था। रेलवे का कहना है कि इसी आधार पर रेलवे भूमि पर बने कथित अवैध निर्माण को हटाने की कार्रवाई की जा रही है। नोटिस में संबंधित पक्षों को स्वयं निर्माण हटाने के लिए 20 जून तक का समय दिया गया है, अन्यथा रेलवे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर सकता है।
दूसरी ओर, अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने रेलवे के नोटिस पर आपत्ति जताई है। कमेटी का कहना है कि नोटिस पर किसी अधिकारी के हस्ताक्षर और जारी करने की तारीख नहीं है, जिससे उसकी वैधता पर सवाल उठते हैं। कमेटी ने यह भी दावा किया कि जिस मुकदमे का हवाला रेलवे दे रहा है, उसका मस्जिद से कोई संबंध नहीं था, बल्कि वह मस्जिद के बाहर की भूमि से जुड़ा मामला था।
कमेटी का कहना है कि गंज शहीदा मस्जिद का इतिहास रेलवे से भी पुराना है। उनके अनुसार मस्जिद का निर्माण वर्ष 1034 में हुआ था और पुराने बंदोबस्त नक्शों में इसका उल्लेख मौजूद है। मस्जिद प्रबंधन ने दावा किया कि रेलवे ने भी पूर्व में अपने शपथ पत्र में मस्जिद के अस्तित्व को स्वीकार किया था। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मस्जिद को हटाने का प्रयास किया गया तो कानूनी स्तर पर इसका विरोध किया जाएगा। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब करीब 336 करोड़ रुपये की लागत से काशी रेलवे स्टेशन को आधुनिक मल्टी मॉडल इंटर-मोडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जा रहा है।