बनारस न्यूज डेस्क: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में बकरीद से पहले दशकों पुराने मशहूर ‘बकरा बाजार’ को बंद किए जाने को लेकर विवाद गहरा गया है। नगर निगम ने भीड़भाड़ और खराब साफ-सफाई का हवाला देते हुए बेनिया बाग स्थित इस बाजार को सील कर दिया। यह बाजार पिछले करीब 40 वर्षों से संचालित हो रहा था और पूर्वी उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े मौसमी पशु बाजारों में गिना जाता है।
बेनिया बाग का यह बाजार काशी विश्वनाथ मंदिर से लगभग एक किलोमीटर दूरी पर स्थित है और हर साल बकरीद से पहले करीब एक सप्ताह तक चलता है। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के अनुसार, बाजार संचालन की अनुमति पहले दी गई थी, लेकिन बाद में स्वच्छता और हाइजीन से जुड़ी शिकायतें मिलने के बाद इसे रद्द कर दिया गया। अधिकारियों ने निरीक्षण के बाद 6,000 वर्गफुट में फैले बाजार को व्यापार शुरू होने के चार दिन बाद सील कर दिया।
कार्रवाई के बाद पशु व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि प्रशासन ने उन्हें बिना पर्याप्त समय दिए बाजार खाली करने का आदेश दिया। व्यापारियों का कहना था कि उन्हें केवल 30 मिनट के भीतर जगह खाली करने को कहा गया। हालांकि, स्मार्ट सिटी वाराणसी के जनसंपर्क अधिकारी शकंभरी नंदन सोंथालिया ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि व्यापारियों को तीन दिन पहले ही बाजार खाली करने का नोटिस दिया गया था।
वहीं, विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने आरोप लगाया कि पहले बाजार की अनुमति देना और फिर अचानक उसे रद्द करना सरकार की सोची-समझी रणनीति लगती है। समाजवादी पार्टी के नेता दिलीप डे ने भी दावा किया कि सरकार बकरीद से पहले सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश कर रही है। फिलहाल यह मामला राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है।