बनारस न्यूज डेस्क: पूर्वांचल समेत वाराणसी इन दिनों भीषण गर्मी और उमस की मार झेल रहा है। बुधवार को शहर का अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि हवा में नमी का स्तर 53 प्रतिशत बना रहा। तेज धूप और उमसभरे मौसम के कारण लोगों को सुबह से ही असहजता का सामना करना पड़ा। मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल हवाएं 6 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हैं, लेकिन इससे गर्मी से विशेष राहत नहीं मिल रही है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 5 जून के आसपास एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है, जिसके प्रभाव से वाराणसी और आसपास के इलाकों में हल्की बारिश होने की संभावना है। हालांकि इस बारिश से तापमान में बड़ी गिरावट आने की उम्मीद नहीं है। मौसम वैज्ञानिक अतुल सिंह के अनुसार अभी तक मानसून केरल नहीं पहुंचा है और उसके बाद ही पूर्वी उत्तर प्रदेश में मानसून के आगमन का स्पष्ट अनुमान लगाया जा सकेगा। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि जून के दूसरे सप्ताह में तापमान एक बार फिर 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच सकता है।
भीषण गर्मी के बीच काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं और जनकल्याण की कामना के लिए विशेष पूजा-अर्चना की गई। मंगला आरती के दौरान बाबा विश्वनाथ का आम के रस, दही और गंगाजल से अभिषेक किया गया तथा विशेष पुष्प अर्पित किए गए। मंदिर प्रशासन के अनुसार बढ़ती गर्मी और जनजीवन पर उसके प्रभाव को देखते हुए यह विशेष धार्मिक आयोजन किया गया, ताकि लोगों को राहत मिलने की प्रार्थना की जा सके।
वहीं, गंगा नदी का घटता जलस्तर भी चिंता का विषय बन गया है। नदी के बीच कई स्थानों पर रेत के बड़े-बड़े टीले उभर आए हैं, जहां कुछ युवक खतरनाक स्टंट करते देखे जा रहे हैं। पर्यावरण वैज्ञानिक प्रो. बीडी त्रिपाठी ने चेतावनी दी है कि गंगा का समय से पहले सिकुड़ना जल संकट का संकेत हो सकता है। उनके अनुसार जलस्तर कम होने से गाद जमने की प्रक्रिया तेज हो जाती है, जिससे नदी की गहराई और जलधारण क्षमता प्रभावित होती है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो नदी की प्राकृतिक शुद्धिकरण क्षमता और जल गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।