स्विट्जरलैंड में वैश्विक शांति बहाली के लिए शुरू हुई अमेरिका-ईरान उच्च स्तरीय कूटनीतिक वार्ता के बीच इजरायल ने एक बार फिर कड़ा सैन्य रुख अपनाया है। इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने स्पष्ट कर दिया है कि हिज्बुल्लाह के साथ हाल ही में घोषित युद्धविराम के बावजूद इजरायली रक्षा बल (IDF) दक्षिणी लेबनान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'सुरक्षा क्षेत्र' (Security Zone) से पीछे नहीं हटेंगे। काट्ज ने कहा कि इजरायली सेना 'यलो लाइन' के पास अपनी मजबूत विखंडन तैनाती बनाए रखेगी, ताकि उत्तरी इजरायल की बस्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और आतंकवादियों के बुनियादी ढांचे के खिलाफ विधिक सैन्य अभियान जारी रखे जा सकें।
इजरायल के इस कड़े कदम पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। तेहरान ने चेतावनी दी है कि लेबनान में इजरायल की लगातार सैन्य मौजूदगी व्यापक अमेरिका-ईरान शांति प्रक्रिया को पूरी तरह खतरे में डाल सकती है। ईरान के राष्ट्रपति कार्यालय के संचार विभाग के उपप्रमुख सैयद मेहदी तबाताबाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कूटनीतिक रुख साझा करते हुए लिखा कि जब तक लेबनान में लड़ाई और इजरायली अपराध पूरी तरह खत्म नहीं हो जाते, तब तक अमेरिका के साथ हुआ समझौता अमान्य माना जाएगा। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकिर गालीबाफ ने भी कहा कि वे इस उल्लंघन के मुद्दे को वार्ता की मेज पर प्रमुखता से उठाएंगे।
इस कूटनीतिक गतिरोध के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने तेहरान का रुख साफ करते हुए दोहराया कि देश का परमाणु हथियार बनाने का कोई इरादा नहीं है और वे सर्वोच्च नेता के आदेशों के प्रति विधिक रूप से प्रतिबद्ध हैं। हालांकि, इजरायल-हिज्बुल्लाह युद्धविराम अब भी बेहद अनिश्चित बना हुआ है क्योंकि दोनों पक्षों ने इसकी अंतिम शर्तों को सार्वजनिक नहीं किया है और जमीनी स्तर पर छिटपुट हवाई हमले और आक्रामक बयानबाजी लगातार जारी है।