फ्रांस इस साल प्रतिष्ठित जी-7 (G-7) शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। अगले महीने 15 से 17 जून तक फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में पूरी दुनिया की नजरें भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संभावित मुलाकात पर टिकी हैं। करीब 16 महीने (डेढ़ साल) के लंबे अंतराल के बाद दोनों शीर्ष नेताओं के बीच यह आमने-सामने की पहली द्विपक्षीय बातचीत होगी। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस खास समिट के लिए पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप दोनों को विशेष तौर पर आमंत्रित किया है। व्हाइट हाउस और भारतीय विदेश मंत्रालय दोनों की तरफ से इस यात्रा की पुष्टि की जा चुकी है।
इससे पहले पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की आखिरी मुलाकात पिछले साल फरवरी में हुई थी, जब प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष निमंत्रण पर अमेरिका के दौरे पर गए थे। उस दौरान दोनों नेताओं के बीच टैरिफ, व्यापार, आतंकवाद और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई थी। हालांकि, इस मुलाकात के बाद भी दोनों नेता लगातार फोन के जरिए कूटनीतिक संपर्क में बने रहे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह आमना-सामना बेहद अहम माना जा रहा है।
'एक्सियोस' (Axios) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस जी-7 समिट में मुख्य रूप से तीन बड़े एजेंडों पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। इनमें अमेरिकी आर्थिक सहायता को सीधे व्यापारिक समझौतों से जोड़ना, वैश्विक स्तर पर अमेरिकी एआई (AI) टूल्स के इस्तेमाल को बढ़ावा देना और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) की सप्लाई चेन पर चीन के एकाधिकार को कम करना शामिल है। ईरान के साथ चल रहे सैन्य तनाव और कुछ अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के कारण इस समय जी-7 के बाकी सदस्य देशों के साथ ट्रंप के रिश्ते थोड़े तल्ख चल रहे हैं, ऐसे में पीएम मोदी के साथ उनकी यह मुलाकात व्यापार, तकनीक और वैश्विक कूटनीति को नई दिशा देने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।