अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में संपन्न हुए ऐतिहासिक ‘इस्लामाबाद समझौते’ (Islamabad MoU) को लेकर वैश्विक भू-राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। इस बीच, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने सीबीएस न्यूज (CBS News) को दिए एक विशेष इंटरव्यू में बड़ा खुलासा करते हुए बताया है कि इस कूटनीतिक शांति समझौते का आधिकारिक और संपूर्ण टेक्स्ट आगामी शुक्रवार तक हर हाल में सार्वजनिक कर दिया जाएगा। वेंस ने स्पष्ट किया कि कतर और पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ (मीडिएटर्स) देशों ने अमेरिका से इस आधिकारिक टेक्स्ट को जारी करने में थोड़ी और देरी करने का अनुरोध किया था, लेकिन अमेरिकी प्रशासन इसे जल्द से जल्द पटल पर रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अमेरिकी जनता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के प्रति अपनी विधिक जवाबदेही दोहराते हुए कहा, “हम असल में आज ही इस समझौते के पूरे ब्यौरे को जारी करने के लिए मध्यस्थों को मनाने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि हम अमेरिकी नागरिकों और दुनिया को पूरी पारदर्शिता के साथ बताना चाहते हैं कि इस ऐतिहासिक डील के भीतर क्या शर्तें शामिल हैं।” गौरतलब है कि जब से दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने जंग खत्म करने के एमओयू पर डिजिटल हस्ताक्षर किए हैं, तब से इसके विखंडन फ्रेमवर्क को लेकर मीडिया में तरह-तरह के कयास और लीक सामने आ रहे हैं। वेंस के इस ताजा बयान के बाद अब इन कयासों पर विराम लगने की उम्मीद है।
टेक्स्ट रिलीज होने से क्यों हिचकिचा रहा है पाकिस्तान?
इस महत्वपूर्ण शांति समझौते में मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले पाकिस्तान और कतर की चिंताओं को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में बड़ी चर्चा छिड़ गई है। खेल और कूटनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मध्यस्थ देशों के डर की प्रमुख वजहें निम्नलिखित हैं:
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रणनीतिक जीत का खुलासा: लीक हुई खबरों के मुताबिक, इस समझौते में ईरान को कड़े तेल प्रतिबंधों से मुक्ति और एसेट्स अनफ्रीज होने जैसी कई बड़ी रणनीतिक विलेख सफलताएं मिलती दिख रही हैं।
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इजराइली लॉबी और ट्रंप पर दबाव: यदि डील का पूरा टेक्स्ट आधिकारिक तौर पर समय से पहले बाहर आता है, तो अमेरिका और इजराइल के भीतर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ घरेलू विरोध बेहद आक्रामक हो सकता है। मध्यस्थों को डर है कि ट्रंप शक्तिशाली इजराइली लॉबी के कूटनीतिक दबाव में आकर इस पूरी शांति प्रक्रिया को रद्द करने पर मजबूर न हो जाएं। इसीलिए पाकिस्तान और कतर फाइनल घोषणा से पहले कोई भी ऐसा विखंडन जोखिम नहीं उठाना चाहते, जिससे इस महत्वपूर्ण डील को कोई खतरा पहुंचे।
$300 अरब के पुनर्निर्माण फंड पर कड़ा रुख
इंटरव्यू के दौरान जब जेडी वेंस से उन खबरों पर सीधा सवाल पूछा गया, जिनमें दावा किया जा रहा है कि इस समझौते के तहत ईरान के लिए 300 अरब डॉलर (लगभग 223.7 अरब पाउंड) का एक विशाल पुनर्निर्माण फंड तय किया गया है, तो उन्होंने बेहद सख्त विधिक रुख अपनाया। उपराष्ट्रपति ने साफ शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, “इनमें से कोई भी वित्तीय मदद या फंड ईरान को तब तक हस्तांतरित नहीं किया जाएगा, जब तक कि ईरानी शासन अंतरराष्ट्रीय समुदाय और दुनिया के साथ अपने व्यवहार में बुनियादी व पारदर्शी बदलाव नहीं लाता।” इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी करदाताओं को आश्वस्त करते हुए स्पष्ट किया कि इस विशाल फंड में अमेरिकी सरकार का कोई पैसा नहीं लगेगा, बल्कि इसकी पूरी फंडिंग खाड़ी क्षेत्र (गल्फ) में मौजूद अमेरिका के मजबूत रणनीतिक सहयोगी देश (अलाय) मिलकर करेंगे।