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प्रेम कीटाणु मूवी रिव्यू: वीर पहाड़िया की मासूमियत और आफिया की ताजगी ने बांधा समां



एक हल्की-फुल्की लेकिन दिल से जुड़ने वाली एंटरटेनर है

Posted On:Friday, October 2, 2026

डायरेक्टर: अपूर्व सिंह कार्की
कास्ट: वीर पहाड़िया, आफिया सैयद, अपारशक्ति खुराना, राकेश बेदी, निखिल विजय
ड्यूरेशन: 2 घंटे 18 मिनट

कॉलेज की मस्ती, दोस्तों के साथ बेफिक्र जिंदगी और अचानक किसी एक इंसान का बाकी सब चीजों से ज्यादा खास लगने लगना—पहला प्यारअक्सर इसी तरह जिंदगी में दस्तक देता है। फिर हर मैसेज में मतलब नजर आने लगता है और दोस्तों की सलाह कई बार समस्या सुलझाने के बजायउसे और उलझा देती है। 'प्रेम कीटाणु' पहली मोहब्बत की इसी मासूमियत और कन्फ्यूजन को हल्के-फुल्के अंदाज में पेश करती है। हालांकि फिल्मकी शुरुआत एक सामान्य रोमांटिक कहानी जैसी लगती है, लेकिन आगे बढ़ते हुए इसमें दोस्ती, परिवार, करियर और भविष्य को लेकर होने वालीउलझनों को भी जगह मिलती है।

वीर पहाड़िया फिल्म में विशाल का किरदार निभाते हैं। विशाल एक बेफिक्र युवा है, जिसे जिंदगी को बहुत गंभीरता से लेने की आदत नहीं है। दोस्तोंके साथ मस्ती और आज में जीना उसकी प्राथमिकता है। भविष्य को लेकर उसके पास कोई स्पष्ट योजना नहीं है। फिर उसकी मुलाकात सुहानी सेहोती है और उसकी जिंदगी का रुख बदलने लगता है। आफिया सैयद ने सुहानी के किरदार से डेब्यू किया है। सुहानी समझदार, आत्मविश्वासी औरअपने भविष्य को लेकर स्पष्ट है। विशाल और सुहानी के व्यक्तित्व में काफी अंतर है और शायद यही अंतर दोनों के बीच आकर्षण की वजह बनता है।लेकिन जैसे-जैसे रिश्ता आगे बढ़ता है, कहानी में रंजीत की एंट्री हालात को पेचीदा कर देती है।

रंजीत के किरदार में अपारशक्ति खुराना फिल्म में अपनी कॉमिक एनर्जी लेकर आते हैं। अच्छी बात यह है कि रंजीत को सिर्फ प्रेम कहानी में रुकावटपैदा करने वाले किरदार के तौर पर पेश नहीं किया गया। उसके अपने विचार और भावनाएं हैं और सुहानी को पसंद करने की उसकी अपनी वजहें हैं।यही बात लव ट्राएंगल को थोड़ा दिलचस्प बनाती है। विशाल को धीरे-धीरे यह समझना पड़ता है कि किसी को पसंद करना और उस पर अपनाअधिकार समझना दो अलग बातें हैं। सुहानी की अपनी पसंद और फैसले भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। विशाल का उसके हर छोटे इशारे का मतलबनिकालना कहानी में कई मजेदार पल पैदा करता है।

वीर पहाड़िया ने विशाल को सहज अंदाज में निभाया है। शुरुआत में उनका किरदार पूरी तरह बेफिक्र नजर आता है, लेकिन कहानी के साथ उसमेंबदलाव आने लगता है। प्यार के साथ उसे अपने करियर और भविष्य के बारे में भी सोचना पड़ता है। पहाड़िया इस बदलाव को बिना किसी अतिरिक्तड्रामे के पेश करते हैं और उनकी स्क्रीन प्रेजेंस स्वाभाविक लगती है। आफिया सैयद फिल्म में ताजगी लेकर आती हैं। सुहानी के किरदार में उनकाआत्मविश्वास और सादगी अच्छी लगती है। वीर और आफिया के बीच की केमिस्ट्री भी फिल्म की खूबियों में शामिल है। उनके बीच की झिझक औरछोटी-छोटी नोकझोंक पहली मोहब्बत की मासूमियत को अच्छी तरह सामने लाती है।

फिल्म का दोस्ती वाला हिस्सा भी काफी मनोरंजक है। विशाल और उसके रूममेट के बीच की बातचीत में दोस्तों वाली बेफिक्री नजर आती है।विशाल जब भी अपनी लव लाइफ को लेकर परेशान होता है, उसका दोस्त सलाह देने के लिए तैयार रहता है, भले ही हर सलाह समझदारी भरी न हो।उसके रिश्तों को लेकर बनाए गए नियम और विशाल की हालत पर उसके रिएक्शन कई जगह हंसाते हैं। अच्छी बात यह है कि कॉमेडी को कहानी परजबरदस्ती थोपा नहीं गया है। यह दोनों किरदारों के रिश्ते और उनकी बातचीत से स्वाभाविक रूप से निकलती है।

फिल्म का पारिवारिक ट्रैक कहानी को एक भावनात्मक परत देता है। राकेश बेदी अपने किरदार में सहज नजर आते हैं और उनके हिस्से में कुछ मजेदारपल भी आते हैं। वहीं विशाल और उसके माता-पिता के बीच का रिश्ता फिल्म को ज्यादा गहराई देता है। यहां कोई बड़ा पारिवारिक ड्रामा नहीं है।छोटे संवादों और रोजमर्रा की परिस्थितियों के जरिए दिखाया गया है कि माता-पिता और बच्चों के बीच प्यार होने के बावजूद एक-दूसरे को समझनाहमेशा आसान नहीं होता। विशाल को भी धीरे-धीरे एहसास होता है कि रिश्तों में आई दूरी के लिए सिर्फ उसके माता-पिता जिम्मेदार नहीं हैं। कई बारहमारी अपनी सोच और उम्मीदें भी रिश्तों को मुश्किल बना देती हैं।

कहानी में बड़ा मोड़ तब आता है जब विशाल का अमेरिकी वीजा मंजूर हो जाता है। अब उसके सामने सिर्फ प्यार का सवाल नहीं है, बल्कि अपनेभविष्य को लेकर भी बड़ा फैसला है। विदेश जाने का मौका उसके करियर को नई दिशा दे सकता है, लेकिन दूसरी तरफ सुहानी और उससे जुड़ीभावनाएं हैं। यही हिस्सा फिल्म को महज रोमांटिक कॉमेडी से आगे ले जाता है। विशाल को पहली बार समझ आता है कि बड़े होने का मतलब सिर्फअपने दिल की सुनना नहीं, बल्कि अपने फैसलों की जिम्मेदारी लेना भी है। फिल्म इस दुविधा को गंभीर जरूर बनाती है, लेकिन अपना हल्का औरमनोरंजक अंदाज बरकरार रखती है।

अपूर्व सिंह कार्की ने फिल्म का टोन यूथफुल और सहज रखा है। नॉर्थ इंडियन पृष्ठभूमि कहानी को परिचित माहौल देती है, जबकि संगीत इसके रोमांटिक मूड और युवा ऊर्जा को बढ़ाता है। कुछ जगहों पर कहानी थोड़ी और कसावट मांगती है, लेकिन फिल्म अपने किरदारों और भावनात्मक जुड़ावके कारण संभल जाती है। कुल मिलाकर, 'प्रेम कीटाणु' सिर्फ दो लोगों की प्रेम कहानी नहीं है। यह उस दौर की कहानी है जब पहली मोहब्बत के साथइंसान को अपने भविष्य, परिवार और खुद के बारे में भी नए सवालों के जवाब तलाशने पड़ते हैं। वीर पहाड़िया की सहज परफॉर्मेंस, आफिया सैयद काफ्रेश डेब्यू और अपारशक्ति खुराना की कॉमिक टाइमिंग फिल्म को एक हल्की-फुल्की लेकिन दिल से जुड़ने वाली एंटरटेनर बनाती है।


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