टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन द्वारा 20 फरवरी 2027 को अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद पद पर न बने रहने की घोषणा के बाद भारतीय शेयर बाजार में टाटा ग्रुप की सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई। विश्लेषकों के अनुसार, समूह के प्रमुख नेतृत्व में अनिश्चितता के कारण निवेशकों के बीच घबराहट का माहौल बना, जिससे एक ही कारोबारी सत्र में टाटा ग्रुप की कंपनियों का संयुक्त बाजार पूंजीकरण (Market Capitalisation) लगभग 68,000 करोड़ रुपये तक घट गया।
बिकवाली का सबसे बड़ा असर समूह की सबसे मूल्यवान आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) पर पड़ा, जिसका शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर इंट्राडे में 5% से अधिक टूटने के बाद 3.93% की गिरावट के साथ बंद हुआ। इसके अलावा टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, टाटा एलेक्सी, टाटा टेक्नोलॉजीज और टाटा मोटर्स के शेयरों में 1.5% से 2.2% तक की गिरावट दर्ज की गई। टाइटन, टाटा स्टील और टाटा पावर जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयर भी दबाव में कारोबार करते दिखे, जिसके चलते बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी भी लाल निशान में बंद हुए।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि चंद्रशेखरन के नौ वर्षों के सफल कार्यकाल और नए व्यवसायों (जैसे सेमीकंडक्टर और ईवी) में उनके योगदान के कारण यह बाजार की तात्कालिक और तीखी प्रतिक्रिया है। 18 अगस्त 2026 को होने वाली टाटा संस की एजीएम (AGM) से पहले आई इस खबर के बाद अब निवेशकों की नजरें नए उत्तराधिकारी के चयन और चयन समिति के गठन पर टिकी हैं। वित्तीय विश्लेषकों के अनुसार, जैसे ही नए चेयरमैन के नाम को लेकर स्पष्टता आएगी, टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में स्थिरता लौटने की संभावना है।