एयर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट से जुड़े मामले में जांच के दौरान कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 4 अगस्त को संचालित Airbus A320 की इस उड़ान के पायलट ने पूछताछ के दौरान बताया कि वह लंबे समय से नींद की समस्या से जूझ रहा था और पारिवारिक डॉक्टर की सलाह पर नींद की दवा ले रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, पायलट ने यह भी दावा किया कि उड़ान के दौरान वह करीब 30 से 35 मिनट के लिए सो गया था।
यह वही फ्लाइट थी, जिसमें उड़ान के दौरान विमान की ऊंचाई अचानक करीब 300 फीट कम हो गई थी। इस घटना में कई यात्रियों और क्रू सदस्यों को चोटें आई थीं। विमान बाद में सुरक्षित रूप से दिल्ली में उतरा। घटना के बाद दोनों पायलटों को जांच पूरी होने तक ड्यूटी से हटा दिया गया और मामले की जांच शुरू की गई।
निजी तनाव के कारण नींद की समस्या का दावा
रिपोर्ट के मुताबिक, पायलट ने जांचकर्ताओं को बताया कि निजी और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण वह तनाव में था और उसे काफी समय से अनिद्रा की शिकायत थी। इसी वजह से वह अपने पारिवारिक डॉक्टर की सलाह पर नींद की दवा ले रहा था।
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि पायलट ने कौन सी दवा ली थी और क्या उसका विमान उड़ाने के दौरान उसकी सतर्कता या निर्णय लेने की क्षमता पर कोई असर पड़ा था। पायलट की ओर से दी गई जानकारी को जांच के अन्य सबूतों और मेडिकल रिपोर्ट के साथ मिलाकर देखा जा रहा है।
उड़ान के दौरान सोने का दावा
सबसे गंभीर दावों में से एक यह है कि पायलट ने उड़ान के दौरान करीब 30-35 मिनट तक सोने की बात कही। हालांकि, इस दावे और इसके विमान संचालन पर प्रभाव को लेकर अंतिम निष्कर्ष अभी जांच के बाद ही सामने आएगा।
इस घटना की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि उसी उड़ान के दौरान विमान ने अचानक लगभग 300 फीट की ऊंचाई खो दी थी। रिपोर्टों के अनुसार, उस समय को-पायलट ने विमान का नियंत्रण संभाला था। जांचकर्ता यह निर्धारित कर रहे हैं कि पायलट की कथित स्थिति और विमान की ऊंचाई में अचानक आई कमी के बीच कोई संबंध था या नहीं।
पायलट के व्यवहार को लेकर भी शिकायत
मामले में पायलट के कथित व्यवहार को लेकर भी चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, केबिन क्रू ने शिकायत की कि पायलट फ्लाइट डेक के फर्श पर बैठा दिखाई दिया और उसने कथित तौर पर धूम्रपान करने की कोशिश भी की। क्रू सदस्यों को उसे वापस सीट तक पहुंचाने में मदद करनी पड़ी। लैंडिंग के बाद भी उसके ठीक से चल नहीं पाने की बात रिपोर्टों में कही गई है।
हालांकि, इन घटनाओं और विमान की ऊंचाई में आई कमी के बीच सीधा संबंध अभी स्थापित नहीं हुआ है। दुर्घटना जांच एजेंसियां तकनीकी और मानवीय दोनों पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही हैं।
ड्रग टेस्ट में भी सामने आया गंभीर मामला
मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि पायलट के पोस्ट-फ्लाइट साइकोएक्टिव सब्सटेंस टेस्ट में शुरुआती जांच के बाद आगे की पुष्टि वाली जांच की जरूरत पड़ी। बाद की मीडिया रिपोर्टों में दूसरे टेस्ट में मारिजुआना के सेवन की पुष्टि का दावा किया गया है। हालांकि, सरकारी अधिकारियों ने कहा है कि जांच प्रक्रिया जारी है और अंतिम निष्कर्ष संबंधित रिपोर्टों के आधार पर ही निकलेगा।
भारत के नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बताया था कि दोनों पायलटों की पोस्ट-फ्लाइट जांच लागू नियमों के तहत की गई थी और मामले की जांच जारी है। Aircraft Accident Investigation Bureau भी घटना की व्यापक जांच कर रहा है।
अब जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं?
जांच में मुख्य रूप से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि पायलट ने कौन सी दवा ली थी, क्या वह दवा उड़ान के समय लेना सुरक्षित था, उसकी वास्तविक मानसिक और शारीरिक स्थिति क्या थी और क्या कथित साइकोएक्टिव पदार्थ का विमान संचालन पर कोई प्रभाव पड़ा।
इसके अलावा, विमान की अचानक ऊंचाई कम होने के तकनीकी कारणों और उस समय कॉकपिट में दोनों पायलटों की स्थिति को भी जांचा जा रहा है। फिलहाल इन सभी पहलुओं पर अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है।