नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) में अपनी रणनीतिक हिस्सेदारी कम करने और चालू वित्त वर्ष के वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। निवेश एवं लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) द्वारा जारी आधिकारिक घोषणा के अनुसार, रेल मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन आने वाली नवरत्न कंपनी 'भारतीय रेलवे वित्त निगम' (IRFC) में सरकार अपनी इक्विटी पूंजी का विनिवेश करने जा रही है। इसके तहत सरकार 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) रूट के माध्यम से बाजार में आईआरएफसी की न्यूनतम एक प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी। हालांकि, संस्थागत और बड़े निवेशकों की ओर से अत्यधिक मांग या ओवर-सब्सक्रिप्शन होने की स्थिति में, सरकार के पास अतिरिक्त एक प्रतिशत हिस्सेदारी (ग्रीन शू ऑप्शन) बेचने का विकल्प भी सुरक्षित रहेगा, जिससे कुल विनिवेश दो प्रतिशत तक हो सकता है।
इस बहुप्रतीक्षित ओएफएस के रणनीतिक लॉजिस्टिक्स के तहत, गैर-खुदरा (Institutional) निवेशकों के लिए बोली लगाने की खिड़की बुधवार (24 जून 2026) को खोल दी गई है, जबकि देश के छोटे खुदरा निवेशक गुरुवार से इस हिस्सेदारी के लिए अपनी विधिक बोलियां जमा कर सकेंगे। वर्तमान विलेख आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक आईआरएफसी में केंद्र सरकार की कुल हिस्सेदारी 84.65 प्रतिशत थी, जिसमें इस विनिवेश के बाद आंशिक कमी आएगी। इस विनिवेश योजना की खबरों के बीच मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार में आईआरएफसी का स्टॉक 2.16 प्रतिशत की गिरावट के साथ 98.69 रुपये के स्तर पर बंद हुआ।
यह विनिवेश सरकार के उस कड़े कूटनीतिक सिलसिले का हिस्सा है, जिसके तहत इसी महीने जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (GIC) की 5%, एनएलसी इंडिया की 3% और एनएचपीसी की 6% हिस्सेदारी बेची गई है। इससे पहले मई में कोल इंडिया और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में भी बड़ी विलेख हिस्सेदारी का विनिवेश किया गया था। आईआरएफसी मुख्य रूप से भारतीय रेलवे की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और आधुनिकीकरण के लिए दीर्घकालिक वित्तीय पूंजी जुटाने का काम करती है।