गुरु पूर्णिमा के अवसर पर फिल्ममेकर करण जौहर ने अपने जीवन और करियर के दो सबसे अहम लोगों—शाहरुख खान और आदित्य चोपड़ा—कोयाद करते हुए एक बेहद भावुक पोस्ट शेयर की हैं। करण ने बताया कि अगर इन दोनों का भरोसा और मार्गदर्शन उन्हें नहीं मिला होता, तो शायद वहकभी फिल्म निर्देशक नहीं बन पाते। उन्होंने अपनी फिल्मी यात्रा के उन अनमोल पलों को साझा किया, जिन्होंने उनकी जिंदगी की दिशा हमेशा केलिए बदल दी।
करण जौहर ने बताया कि जब वह आगे की पढ़ाई के लिए विदेश जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी एक रात करीब एक बजे आदित्य चोपड़ा ने उन्हें'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' (DDLJ) में असिस्ट करने का प्रस्ताव दिया। करण के मुताबिक, उसी बातचीत में आदित्य ने उनसे कहा था कि उनकेअंदर एक निर्देशक बनने की क्षमता है और अगर उन्होंने इस रास्ते को नहीं चुना, तो वह अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती करेंगे। उस रात करण सोनहीं पाए और अगली सुबह उन्होंने अपने पिता, दिवंगत निर्माता यश जौहर, से पढ़ाई छोड़कर एक साल फिल्म सेट पर काम करने की अनुमति मांगी।करण ने बताया कि उनके पिता ने उनसे सिर्फ़ एक वादा लिया—कि वह पूरी मेहनत और ईमानदारी से सीखेंगे। यही सीख आगे चलकर उनके करियरकी मजबूत नींव बनी।
करण ने अपने पोस्ट में शाहरुख खान से जुड़ी एक यादगार घटना भी शेयर की। उन्होंने बताया कि DDLJ की शूटिंग के दौरान स्विट्जरलैंड कीपहाड़ियों में खड़े हुए शाहरुख ने उनसे कहा था, "तू डायरेक्टर बनेगा और तेरी पहली फिल्म मैं करूंगा।" करण ने मजाकिया अंदाज़ में लिखा कि उससमय उन्हें लगा था कि शायद शाहरुख मजाक कर रहे हैं, लेकिन भारत लौटने के बाद अभिनेता ने उनके पिता से भी यही बात दोहराई। यही भरोसाबाद में 'कुछ कुछ होता है' के रूप में साकार हुआ, जिसने करण जौहर को निर्देशक के तौर पर नई पहचान दिलाई और बॉलीवुड के सबसे सफलफिल्ममेकर्स की कतार में खड़ा कर दिया।
अपने भावुक संदेश के अंत में करण ने आदित्य चोपड़ा और शाहरुख खान का दिल से आभार जताते हुए लिखा कि उनकी हर सफलता, हर सीख औरहर कहानी के पीछे इन दोनों का विश्वास है। उन्होंने कहा कि वह अपनी सभी खूबियों, कमियों, जीत और हार के साथ आज जहां भी हैं, उसकी सबसेबड़ी वजह यही दो लोग हैं। गुरु पूर्णिमा के मौके पर किया गया यह पोस्ट सिर्फ़ एक धन्यवाद नहीं था, बल्कि उन गुरुओं को समर्पित श्रद्धांजलि थीजिन्होंने करण को खुद पर भरोसा करना सिखाया और उनके सपनों को उड़ान दी।
साल 1995 में 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' से असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में शुरुआत करने वाले करण जौहर ने 1998 में 'कुछ कुछ होता है' सेनिर्देशन की दुनिया में कदम रखा और पहली ही फिल्म से इतिहास रच दिया। गुरु पूर्णिमा पर साझा किया गया उनका यह संदेश याद दिलाता है किहर सफल इंसान के पीछे ऐसे गुरु और मार्गदर्शक होते हैं, जो दुनिया से पहले उसकी क्षमता को पहचानते हैं और उसे अपने सपनों को सच करने काहौसला देते हैं।