बनारस न्यूज डेस्क: वाराणसी में मंगलवार सुबह मौसम ने अचानक करवट ली। सुबह तेज धूप और उमस के बाद करीब 10:50 बजे कई इलाकों में तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश से गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, गंगा का पानी घटने के बाद घाटों पर जमा हुई सिल्ट और गीली मिट्टी अब लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। इससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को घाटों पर आने-जाने में दिक्कत हो रही है।
मौसम विभाग ने पहले ही मंगलवार को बादल छाने, गरज-चमक और बारिश की संभावना जताई थी। मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार मानसूनी ट्रफ के उत्तर दिशा में खिसकने के संकेत मिल रहे हैं। इसके असर से अगले दो से तीन दिनों के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। ऐसे में वाराणसी में भी मौसम में बदलाव जारी रहने की संभावना है।
उधर, गंगा का जलस्तर लगातार कम हो रहा है, लेकिन इससे घाटों की दूसरी समस्या सामने आ गई है। पानी पीछे हटने के बाद किनारों पर काफी मात्रा में सिल्ट और कीचड़ जमा है। स्थानीय लोगों ने घाटों की जल्द सफाई कराने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल मजदूरों से सफाई कराने में ज्यादा समय लग सकता है, इसलिए जरूरत वाली जगहों पर पंप और मशीनों की मदद से गाद हटाई जाए।
गंगा का पानी घटने के बावजूद बाढ़ का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। वाराणसी के 84 घाटों का संपर्क अब भी टूटा हुआ है। मणिकर्णिका घाट पर छत के ऊपर और हरिश्चंद्र घाट की गलियों में अंतिम संस्कार की व्यवस्था चल रही है। अगर आने वाले दिनों में गंगा का जलस्तर फिर नहीं बढ़ता है तो पानी और नीचे जाने के साथ घाटों का संपर्क धीरे-धीरे बहाल हो सकता है। वहीं, आईएमडी के अनुसार उत्तर-पश्चिम भारत से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी करीब 19 सितंबर से शुरू होने के लिए परिस्थितियां बन रही हैं।