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नौसेना को मिला नया युद्धपोत तारागिरी, समंदर में चीन-PAK की चाल होगी नाकाम

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Posted On:Saturday, November 29, 2025

प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट 'तारागिरी' को औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया है। पिछले 11 महीनों में नौसेना को मिला यह चौथा P17A युद्धपोत है, जो न केवल भारत की शिपबिल्डिंग क्षमता को दिखाता है, बल्कि चीन और पाकिस्तान द्वारा हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के बीच, क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों में भी महत्वपूर्ण बदलाव लाता है।

Mazagon Dock Shipbuilders Limited (MDL) द्वारा निर्मित 'तारागिरी', रिकॉर्ड समय में बनने वाला जहाज़ है, जिसने भारत की आत्मनिर्भर भारत पहल को एक नई ऊँचाई दी है।

आधुनिक टेक्नोलॉजी और दमदार हथियार

तारागिरी अत्याधुनिक तकनीक और शक्तिशाली हथियारों से लैस है, जो इसे एक दुर्जेय युद्धपोत बनाते हैं।

  • CODOG और IPMS: इसमें CODOG (Combined Diesel or Gas) प्रणाली, CPP (Controllable Pitch Propellers), और स्मार्ट इंटिग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम (IPMS) लगाई गई है, जो इसे समुद्र में तेज़, शांत और अधिक फुर्तीला बनाती है।

  • मुख्य हथियार प्रणाली:

    • ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइलें: हिंद महासागर में किसी भी सतह लक्ष्य को मिनटों में निशाना बनाने में सक्षम।

    • MRSAM एयर-डिफेंस सिस्टम: हवाई खतरों से प्रभावी बचाव।

    • MFSTAR मल्टीफंक्शन रडार: स्टेल्थ और मिसाइल खतरों का शुरुआती पता लगाने की क्षमता।

    • पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW): सबमरीन रोधी युद्ध के लिए टॉरपीडो और रॉकेट से लैस।

रिकॉर्ड समय में निर्माण और स्वदेशी क्षमता

P17A सीरीज़ के पहले दो जहाज़ों के अनुभव का लाभ उठाते हुए, 'तारागिरी' के निर्माण समय को घटाकर 81 महीने कर दिया गया है, जबकि पहले जहाज़ 'नीलगिरी' को बनने में 93 महीने लगे थे।

  • 75% स्वदेशी सामग्री के उपयोग के साथ, यह जहाज़ स्वदेशी क्षमता का प्रतीक है।

  • इस परियोजना ने 200 से अधिक MSMEs और 14,000 से अधिक लोगों को रोज़गार प्रदान किया है।

प्रोजेक्ट 17A के शेष तीन जहाज़ अगस्त 2026 तक नौसेना को सौंप दिए जाएंगे (MDL में एक और GRSE में दो)।

geopolitics: चीन की बढ़ती चुनौती और 'तारागिरी' का रणनीतिक महत्व

'तारागिरी' का नौसेना में शामिल होना, चीन और पाकिस्तान की बढ़ती समुद्री चुनौतियों के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है:

1. हिंद महासागर में PLA नौसेना की बढ़ती तैनाती

चीन पिछले कुछ वर्षों से IOR में नियमित रूप से युद्धपोत, युआन-क्लास पनडुब्बियां, और स्पाई शिप भेज रहा है। 'तारागिरी', अपने उन्नत सेंसर और पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW) क्षमता के साथ, PLA नौसेना की पनडुब्बियों की गतिविधियों पर निगरानी रखने में बड़ी भूमिका निभाएगा।

2. 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' नेटवर्क को काउंटर

चीन का 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' नेटवर्क (जैसे जिबूती, ग्वादर, हंबनटोटा) भारत को समुद्री रूप से घेरने की रणनीति माना जाता है। ऐसे माहौल में, तेज़ी से प्रतिक्रिया दे सकने वाला, लंबी दूरी तक मार करने वाला, और स्टेल्थ क्षमताओं वाला 'तारागिरी', हिंद महासागर में भारत की डिटरेंस पावर (Deterrence Power) को मजबूत करता है।

3. पाक-चीन नौसैनिक साझेदारी पर निगरानी

पाकिस्तान चीन से Type-054A/P गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट और Hangor-Class पनडुब्बियां प्राप्त कर रहा है। ग्वादर पोर्ट पर चीन की बढ़ती मौजूदगी और पाकिस्तान नौसेना को मिलने वाले नए जहाज़ भारत के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं।

  • 'तारागिरी' की ब्रह्मोस क्षमता यह सुनिश्चित करती है कि भारत का वेस्टर्न सी-फ्रंट सुरक्षित रहे और अरब सागर में पाकिस्तान-चीन की संयुक्त गतिविधियों की निगरानी में मजबूती मिले।

चीन के बढ़ते समुद्री प्रभाव और पाकिस्तान के साथ उसकी नज़दीकी के बीच, 'तारागिरी' का नौसेना में शामिल होना केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत के समुद्री शक्ति संतुलन में रणनीतिक बढ़त की दिशा में एक बड़ा कदम है।


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