महाराष्ट्र के रत्नागिरी स्थित जेएसडब्ल्यू जयगढ़ पोर्ट पर एक विदेशी जहाज 'आमिर गैस' को लेकर बड़ा कूटनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। मुंबई हाई कोर्ट के जस्टिस अभय आहुजा की खंडपीठ ने इस जहाज को तत्काल प्रभाव से जब्त करने का आदेश जारी किया है। अदालत ने सख्त निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई तक जहाज पर लदा माल (एलपीजी मिक्स) नहीं उतारा जाएगा और पोर्ट प्रशासन इसे किसी भी सूरत में 'आउटवर्ड पोर्ट क्लियरेंस' नहीं देगा।
इस मामले की जड़ें एक अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी से जुड़ी हैं। 'झांग यूनियन इंटरनेशनल' द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, जहाज पर मौजूद कार्गो को मूल रूप से इराक में लोड किया गया था और इसे पाकिस्तान भेजा जाना था। हालांकि, बीच रास्ते में ही फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जहाज का मार्ग बदल दिया गया और इसे महाराष्ट्र के जयगढ़ बंदरगाह की ओर मोड़ दिया गया। जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि जहाज के संचालन को लेकर विवाद पैदा किया गया और दुबई में नए मास्टर (कप्तान) को गुमराह कर जाली कागजात तैयार किए गए।
अदालत ने पाया कि जहाज के मालिकाना हक को लेकर भी दो पक्षों में विवाद है और गैस ढुलाई के लिए किराए पर लिए गए इस जहाज का इस्तेमाल गलत तरीके से किया जा रहा था। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जहाज भारतीय समुद्री सीमा से बाहर नहीं जाना चाहिए और सारा माल सुरक्षित रखा जाए। मूल मालिक की सतर्कता के कारण यह करोड़ों का खेल उजागर हुआ है। स्थानीय शिपिंग एजेंटों और जहाज के नए अधिकारियों की भूमिका अब गहन जांच के दायरे में है, क्योंकि यह मामला न केवल व्यापारिक धोखाधड़ी बल्कि समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन से भी जुड़ा नजर आ रहा है।