राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर दिए गए एक बयान पर भारी चौतरफा घिरने के बाद पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने आखिरकार अपने तेवर नरम कर लिए हैं। घाटी में बढ़ते राजनीतिक दबाव और जनता के कड़े विरोध को देखते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने श्रीनगर में एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर अपने 'बनता है' वाले बयान पर सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांग ली।
संवाददाता सम्मेलन में महबूबा मुफ्ती ने स्पष्ट किया कि विवादित वीडियो पूरी तरह असली है और सोशल मीडिया पर एआई (AI) द्वारा बनाए जाने की जो चर्चा चल रही थी, वह निराधार है। अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि उनका इरादा कश्मीरी प्रदर्शनकारियों या आम जनता को ठेस पहुंचाने का बिल्कुल नहीं था। उन्होंने इस पूरे विवाद का कारण 'जुबान फिसलना' (slip of the tongue) और एक महत्वपूर्ण शब्द का छूट जाना बताया। महबूबा के मुताबिक, वह कहना चाहती थीं कि 'सुरक्षा बलों को हिंसा का बहाना बनता है', लेकिन हड़बड़ाहट में 'बहाना' शब्द उनके मुंह से निकल नहीं पाया, जिससे पूरे बयान का अर्थ बदल गया और यह धारणा बनी कि वह पैलेट गन की कार्रवाई का समर्थन कर रही हैं।
गौरतलब है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सहित कई क्षेत्रीय दलों ने उनके इस वक्तव्य की कड़े शब्दों में निंदा की थी। आलोचकों का आरोप था कि महबूबा मुफ्ती शांतिपूर्ण कश्मीरी युवाओं की तुलना उग्रवादियों से कर रही हैं और अपनी पिछली सरकार के दौरान हुए बल प्रयोग को सही ठहराने का प्रयास कर रही हैं। इस भारी विवाद और जन-आक्रोश को भांपते हुए पीडीपी अध्यक्ष ने स्वीकार किया कि लोगों का उन पर गुस्सा होना स्वाभाविक है और उन्होंने हमेशा जनता के अधिकारों के लिए ही संघर्ष किया है।