भारत में 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नियमों को लेकर एक बड़ा वैश्विक मोड़ सामने आया है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, 0.4 प्रतिशत एमडीआर का यह नया ढांचा केवल भारत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि फ्रांस, यूएई, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, मॉरीशस, कतर, कंबोडिया, ग्रीस और मालदीव जैसे उन सभी 11 देशों में लागू होगा जहां वर्तमान में यूपीआई सेवाएं संचालित हो रही हैं।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर यूपीआई इकोसिस्टम को आत्मनिर्भर और वित्तीय रूप से मजबूत बनाना है। हालांकि, विदेश यात्रा करने वाले भारतीय नागरिकों, पर्यटकों और छात्रों के लिए लेनदेन पूरी तरह से निशुल्क रहेगा; यह शुल्क केवल अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सेवाएं देने वाले विदेशी मर्चेंट्स और एक्वायरिंग पार्टनर्स पर लागू होगा। सरकार ने 15 अक्टूबर की डेडलाइन में किसी भी बदलाव की संभावना से साफ इनकार कर दिया है।
दूसरी ओर, भारत में नए एमडीआर नियमों के खिलाफ व्यापारिक संघों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल से जुड़े कारोबारियों ने 2 अक्टूबर को देशव्यापी 'नो यूपीआई डे' (No UPI Day) मनाने की घोषणा की है, जिसके तहत दुकानों से क्यूआर बोर्ड हटाने अथवा उन्हें काले कपड़े से ढकने का निर्णय लिया गया है। वहीं, सरकार का रुख स्पष्ट है कि डिजिटल भुगतान अवसंरचना के विकास के लिए यह नीतिगत बदलाव अपरिहार्य है।