चारधाम यात्रा, मानसून सत्र और आपदा प्रबंधन की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (ESMA) के तहत अधिसूचना जारी करते हुए अगले छह महीनों के लिए राज्य की सभी राज्याधीन और आवश्यक सेवाओं में कर्मचारियों द्वारा किसी भी प्रकार की हड़ताल पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। कार्मिक एवं सतर्कता विभाग द्वारा जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से पूरे प्रदेश में लागू हो गया है।
यह सख्त कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब राज्य के विभिन्न कर्मचारी संगठन वेतन विसंगतियों, समयबद्ध पदोन्नति और सेवा शर्तों में सुधार जैसी मांगों को लेकर आंदोलन और कार्य बहिष्कार की चेतावनी दे रहे थे। सरकार को अंदेशा था कि यदि स्वास्थ्य, पेयजल, विद्युत, परिवहन और पुलिस जैसी अति-आवश्यक सेवाओं के कर्मचारी हड़ताल पर जाते हैं, तो इससे आम नागरिकों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। विशेषकर वर्तमान में जारी चारधाम यात्रा के दौरान देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाएं प्रभावित हो सकती थीं।
उत्तराखंड में प्रभावी इस कानून के लागू होने के बाद यदि कोई भी कर्मचारी संगठन या सेवा संघ हड़ताल या कार्य बहिष्कार में शामिल होता है, तो उसे गैर-कानूनी माना जाएगा। एस्मा के प्रावधानों के उल्लंघन पर पुलिस को बिना वारंट गिरफ्तारी करने और कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार होगा। शासन का मानना है कि मानसून के दौरान भूस्खलन और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए सभी सरकारी तंत्रों का चौबीसों घंटे मुस्तैद रहना अत्यंत आवश्यक है।