सिरदर्द, जोड़ों का दर्द या बुखार होने पर अक्सर लोग बिना डॉक्टरी सलाह के पेनकिलर (दर्द निवारक दवाएं) ले लेते हैं। लेकिन ओवर-द-काउंटर (OTC) मिलने वाली इन दवाओं का अनियंत्रित या गलत तरीके से सेवन लिवर के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। हाल ही में पीएसआरआई अस्पताल (PSRI Hospital) के जीआई सर्जरी और लिवर ट्रांसप्लांटेशन विभाग के सीनियर कंसलटेंट डॉ. भूषण भोले ने इस गंभीर समस्या पर प्रकाश डाला है।
सबसे बड़ा जोखिम: पैरासिटामोल का अनजाने में ओवरडोज
डॉ. भूषण भोले के अनुसार, ओवर-द-काउंटर पेनकिलर्स में लिवर के लिए सबसे बड़ा खतरा पैरासिटामोल (एसिटामिनोफेन) का अत्यधिक सेवन है।
- अनजाने में ओवरडोज: कई लोगों को यह पता नहीं होता कि पैरासिटामोल केवल दर्द की दवा में ही नहीं, बल्कि सर्दी, जुकाम और बुखार की कई अन्य दवाओं में भी मौजूद होता है। जब कोई व्यक्ति एक साथ ऐसी कई दवाएं लेता है, तो शरीर में पैरासिटामोल की मात्रा सुरक्षित दैनिक सीमा से अधिक हो जाती है।
- एक्यूट लिवर फेलियर: सही मात्रा में लेने पर पैरासिटामोल सुरक्षित है, लेकिन तय सीमा से अधिक खुराक या अनजाने में कई दवाएं मिलाकर लेने से लिवर को गंभीर नुकसान पहुँच सकता है और यहाँ तक कि 'एक्यूट लिवर फेलियर' भी हो सकता है।
NSAIDs (आईबुप्रोफेन, डिक्लोफेनेक) से जुड़े जोखिम
आईबुप्रोफेन, डिक्लोफेनेक और नेप्रोक्सन जैसी नॉन-स्टेरॉयड एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं (NSAIDs) आमतौर पर पेट में अल्सर या किडनी की समस्याओं के लिए जानी जाती हैं, लेकिन लंबे समय तक या भारी मात्रा में इनका इस्तेमाल करने से ये भी लिवर को नुकसान पहुंचा सकती हैं। NSAIDs में डिक्लोफेनेक के कारण लिवर एंजाइम बढ़ने और क्षति होने की संभावना अधिक पाई गई है।
किन परिस्थितियों में बढ़ता है लिवर डैमेज का खतरा?
विशेषज्ञों के मुताबिक, लिवर को नुकसान पहुंचने की संभावना तब काफी बढ़ जाती है जब:
- पैरासिटामोल की दैनिक तय सीमा का उल्लंघन किया जाए।
- पैरासिटामोल युक्त एक से अधिक दवाओं का एक साथ सेवन किया जाए।
- नियमित रूप से शराब का सेवन किया जाता हो।
- व्यक्ति को पहले से ही लिवर से जुड़ी कोई बीमारी हो।
- बिना डॉक्टरी देखरेख के लंबे समय तक पेनकिलर्स लिए जाएं।
बिना दवाओं के दर्द से कैसे पाएं राहत?
डॉ. भोले का कहना है कि पेनकिलर्स केवल अस्थायी राहत के लिए हैं, किसी बीमारी का स्थायी इलाज नहीं। बार-बार पेनकिलर लेने के बजाय दर्द के असली कारण का इलाज कराना चाहिए। उन्होंने कुछ जीवनशैली से जुड़े उपाय सुझाए हैं:
- नियमित व्यायाम और स्ट्रेचिंग: मांसपेशियों और जोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए।
- फिजियोथेरेपी: पुरानी पीठ, गर्दन या जोड़ों के दर्द के लिए।
- वजन नियंत्रित रखें: जिससे जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
अन्य उपाय: पर्याप्त नींद लें, तनाव कम करने के लिए योग या ध्यान करें, और मांसपेशियों के खिंचाव के लिए गर्म या ठंडी सिकाई (Heat/Cold packs) का उपयोग करें।