बनारस न्यूज डेस्क: वाराणसी शहर की एक 50 फीट चौड़ी सड़क पर जब करीब 30 फीट तक अतिक्रमण हो जाए, तो जाम और अव्यवस्था स्वाभाविक है। हैरानी की बात यह है कि यह कब्जा किसी ठेले या फुटपाथ दुकानदारों ने नहीं, बल्कि दो सरकारी विभागों और खुद को प्रबुद्ध कहने वाले लोगों द्वारा किया गया है। नतीजतन सड़क का असली स्वरूप ही खत्म हो गया है।
सड़क की एक लेन पर प्रशासनिक अधिकारियों के वाहन खड़े रहते हैं, जबकि दूसरी लेन पर वकीलों, फरियादियों और अन्य लोगों की गाड़ियां जमी रहती हैं। इसका असर महज 400 मीटर के हिस्से तक सीमित नहीं रहता, बल्कि तीन किलोमीटर तक यातायात पूरी तरह प्रभावित हो जाता है। इसके बावजूद पुलिस और ट्रैफिक विभाग यहां कार्रवाई करने से बचते नजर आते हैं।
स्थिति यह है कि पूरे साल में कभी-कभार ही कार्रवाई होती है, वह भी सिर्फ वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान। पुलिस लाइन से कचहरी, नदेसर और आसपास के इलाके रोजाना जाम की चपेट में रहते हैं। सुबह और शाम के समय हालात और ज्यादा खराब हो जाते हैं, जब स्कूली वाहन, एंबुलेंस, मरीज, नौकरीपेशा लोग और आम नागरिक घंटों फंसे रहते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों ओर खड़ी गाड़ियों के कारण सड़क सिकुड़कर महज 10 से 15 फीट की रह जाती है। इसी संकरी जगह से बसें, कारें, ऑटो, ई-रिक्शा और दोपहिया वाहन गुजरने को मजबूर होते हैं। 400 मीटर के इस अतिक्रमण की सजा पुलिस लाइन से लेकर भोजूबीर, पांडेयपुर और शिवपुर तक के इलाकों को रोजाना भुगतनी पड़ रही है।