बनारस न्यूज डेस्क: यूपी के कई जिले इस वक्त बाढ़ की मार झेल रहे हैं। मथुरा, प्रयागराज, कानपुर और वाराणसी जैसे बड़े शहरों में हालात सबसे ज्यादा बिगड़े हुए हैं। कहीं गंगा तो कहीं यमुना उफान पर है। लगातार बारिश और बैराजों से छोड़े जा रहे पानी ने हालात को और गंभीर बना दिया है। कई इलाकों के लोग अपने घर छोड़कर ऊंचे स्थानों पर शरण ले चुके हैं। नदियों पर बने पुल और मार्ग भी बंद कर दिए गए हैं, जिससे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
मथुरा में यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। शुक्रवार को इसमें और तेजी आई जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया। किसानों की खरीफ की फसलें जैसे ज्वार, बाजरा और धान पानी में डूबकर नष्ट हो गईं। वहीं पशुपालकों के सामने चारे का संकट खड़ा हो गया है। नौहझील-शेरगढ़ मार्ग पर भी बाढ़ का पानी भरने से लोगों की आवाजाही रुक गई है। हालत यह है कि चौपहिया वाहन निकालने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली का सहारा लेना पड़ रहा है और इसके लिए लोगों से 300 रुपये तक वसूले जा रहे हैं।
प्रयागराज में गंगा-यमुना का जलस्तर गिरना शुरू हुआ है, लेकिन लोगों में डर अभी भी बना हुआ है। शुक्रवार सुबह यमुना का जलस्तर बीते 24 घंटों में 24 सेंटीमीटर घटा जबकि गंगा में थोड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि दोपहर बाद गंगा और यमुना दोनों में घटाव दर्ज हुआ। शाम तक फाफामऊ, छतनाग और नैनी में जलस्तर कुछ कम होने से लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन दहशत खत्म नहीं हुई।
कानपुर और आसपास के इलाकों में गंगा नदी अब भी कहर बरपा रही है। बीस दिन बीत चुके हैं, लेकिन जलस्तर कम होने का नाम नहीं ले रहा। शुक्रवार को गंगा खतरे के निशान से 20 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। शमसाबाद और आसपास के गांवों में बाढ़ का पानी घरों और खेतों में भरा है। हालांकि शाम तक जलस्तर में प्रति घंटा एक सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज हुई, जिससे तटीय इलाकों के लोगों को थोड़ी राहत मिली। इसके बावजूद कई गांव अब भी जलमग्न हैं और फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं।