बनारस न्यूज डेस्क: वाराणसी के सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में तीन दिवसीय संस्कृति संसद की शुरुआत हुई। इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे 1500 से अधिक साधु-संतों, महामंडलेश्वरों और आचार्यों ने सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। संतों ने धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए सभी पंथों को एक साथ आने की अपील की। उनका कहना था कि सनातन धर्म की सुरक्षा के साथ ही राष्ट्र की सुरक्षा भी जुड़ी है। इसके लिए समाज में जागरूकता बढ़ाने, युवाओं को जोड़ने और गो संरक्षण के लिए कानून बनाने की जरूरत है।
संस्कृति संसद की अध्यक्षता कर रहे स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि सनातन धर्म और संस्कृति को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में लोगों को जागरूक करना जरूरी है। उन्होंने गोमाता को भारतीय संस्कृति का आधार बताते हुए उनकी रक्षा के लिए कानून बनाने की मांग की। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महामंडलेश्वर रवींद्रपुरी महाराज ने कहा कि संत समाज ने हमेशा धर्म की रक्षा में अहम भूमिका निभाई है और मौजूदा चुनौतियों के बीच भी संतों को आगे आना होगा। वहीं, स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने धर्म और संस्कृति के खिलाफ हो रही गतिविधियों का मुकाबला करने के लिए संतों से सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जेन-जी के नाम पर युवाओं को बांटना ठीक नहीं है। युवाओं को समाज और देश के विकास में अपनी भागीदारी निभानी चाहिए।
विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक दिनेश ने परिवार और समाज को प्रभावित करने वाले कुछ कानूनों में बदलाव की जरूरत बताई। उन्होंने लिव-इन रिलेशनशिप और बेटियों को पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी देने से जुड़े कानूनों का जिक्र किया। वहीं, विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक ने हिंदुओं की जनसंख्या में असंतुलन और धर्मांतरण को चुनौती बताते हुए समाज में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भगवान राम, शिव और कृष्ण को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां भी सामने आ रही हैं, ऐसे में संतों को लोगों के बीच जाकर जागरूकता फैलानी चाहिए। प्रख्यात कथावाचक आचार्य सुधांशु महाराज ने कहा कि संस्कृति और संस्कारों को बचाने के लिए गुरुकुलों के साथ संस्कार केंद्रों का भी विस्तार जरूरी है। उन्होंने युवाओं के असंतोष को समाज और व्यवस्था के लिए सजग होने का संकेत बताया। आयोजन समिति के अध्यक्ष सुनील देवधर ने भी युवाओं से भ्रमित हुए बिना राष्ट्र के विकास में योगदान देने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान विहिप के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय को सम्मानित किया गया और ‘संस्कृति पर्व’ पत्रिका का लोकार्पण हुआ। कार्यक्रम का स्वागत प्रो. अरविंद जोशी और प्रो. ओमप्रकाश सिंह ने किया, जबकि संचालन संत समिति के कोषाध्यक्ष जनार्दन हरि ने किया। आयोजन में भारतीय संत समिति के अध्यक्ष कैवल्य पीठाधीश्वर जगद्गुरु अविचलदेवाचार्य महाराज, महामंडलेश्वर मनमोहन दास ‘राधे-राधे बाबा’, काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष पद्मभूषण प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी, कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. रामचंद्र पांडेय और महामंत्री डॉ. रामनारायण द्विवेदी सहित विभिन्न प्रांतों से आए 1500 से अधिक संत, महामंडलेश्वर, आचार्य और उनके शिष्य मौजूद रहे।