बनारस न्यूज डेस्क: वाराणसी में पुलिस और पीएसी जवानों के हथियारों से हुई आकस्मिक फायरिंग की घटनाओं ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और हथियारों की हैंडलिंग पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल के वर्षों में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें पुलिसकर्मी खुद भी घायल हुए हैं और आम नागरिक भी इसकी चपेट में आए हैं।
शनिवार को काशी विश्वनाथ धाम के गेट नंबर 4B (नंदू फेरिया गेट) के पास ड्यूटी पर तैनात एक पीएसी जवान की कार्बाइन से अचानक फायर हो गया। इस हादसे में पास की फूल दुकान पर काम कर रहे तीन कर्मचारी घायल हो गए। इससे पहले मार्च 2025 में भी गोडौलिया और मंदिर के गेट नंबर 4 के बीच एक पीएसी जवान की कार्बाइन कंधे से फिसलकर गिर गई थी, जिससे अचानक गोली चल गई। उस घटना में जवान की आंख और एक पान दुकान के कर्मचारी की जांघ में गोली लगी थी।
जांच में सामने आया था कि जवान ड्यूटी के दौरान एक पान की दुकान पर रुका था। इसी दौरान कार्बाइन की स्लिंग टूट गई और हथियार जमीन पर गिरते ही फायर हो गया। इस घटना के बाद भी हथियारों के रखरखाव और सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठे थे।
इससे पहले मार्च 2022 में चितईपुर थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर मनीष सिंह की अपने सर्विस पिस्टल की सफाई के दौरान आकस्मिक फायरिंग में मौत हो गई थी। गोली उनके जबड़े और सिर में लगी थी। गंभीर हालत में उन्हें बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां नौ दिन तक इलाज के बाद उन्होंने दम तोड़ दिया।