बनारस न्यूज डेस्क: वाराणसी की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अदालत ने पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर के खिलाफ दर्ज एक मामले में जांच की धीमी रफ्तार पर चौक थाना पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने पुलिस से जल्द प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है और मामले की अगली सुनवाई 1 अगस्त तय की है।
सुनवाई के दौरान अमिताभ ठाकुर के वकील ने अदालत को बताया कि एफआईआर दर्ज होने और गिरफ्तारी के करीब आठ महीने बाद भी पुलिस न तो जांच पूरी कर सकी है और न ही चार्जशीट दाखिल की गई है। इस पर अदालत ने पिछली तारीख पर चौक थाना पुलिस को जांच की प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था।
शुक्रवार को जब मामला दोबारा कोर्ट में आया तो पुलिस की ओर से कोई प्रगति रिपोर्ट पेश नहीं की जा सकी। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए मौजूद पुलिस अधिकारी को फटकार लगाई और जल्द से जल्द रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला हिंदू युवा वाहिनी से जुड़े अंबरीश सिंह भोला की शिकायत पर दर्ज हुआ था। उनका आरोप है कि 30 नवंबर 2025 को पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो और पत्र साझा किया, जिसमें उन पर कथित तौर पर कफ सिरप तस्करी से जुड़े आरोप लगाए गए। शिकायतकर्ता का कहना है कि इन आरोपों से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
शिकायत में यह भी कहा गया कि पोस्ट किए गए पत्र पर अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी डॉ. नूतन ठाकुर का नाम था, जिसमें दोनों को आजाद अधिकार सेना का पदाधिकारी बताया गया था। आरोप है कि यही सामग्री अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी साझा की गई।
शिकायत के आधार पर चौक थाना पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने अदालत से बी-वारंट प्राप्त करने के बाद अमिताभ ठाकुर को गिरफ्तार भी किया था।
अमिताभ ठाकुर ने की थी जांच की मांग
अमिताभ ठाकुर ने इससे पहले दावा किया था कि उन्हें कफ सिरप मामले से जुड़े कुछ वीडियो और जानकारियां मिली थीं। उन्होंने इन तथ्यों को उत्तर प्रदेश के डीजीपी और अन्य अधिकारियों को भेजकर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी। उनका कहना था कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर मामले की जांच जरूरी है। इसी घटनाक्रम के बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई।