बनारस न्यूज डेस्क: बनारस की गंगा-जमुनी तहजीब को एक नया आयाम देते हुए शहर के इरशाद अली ने भारतीय संविधान की एक बेहद अनोखी प्रति तैयार की है। इस खास किताब की खासियत यह है कि इसे कागज या स्याही से नहीं, बल्कि सूती कपड़े पर गंगा की मिट्टी और गंगाजल की मदद से लिखा गया है। इरशाद अली ने अपनी कड़ी मेहनत से संविधान के कई महत्वपूर्ण हिस्सों को इस अनोखे अंदाज में उकेरा है और इसकी बेहद खूबसूरत बाइंडिंग भी कराई है।
इरशाद अली ने इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए पहले संविधान पर गहरा शोध किया और फिर उसे बारीकी से समझा। उन्होंने 2 फीट लंबे और 1 फीट चौड़े सूती कपड़े के टुकड़ों पर गंगा की माटी, गंगाजल, खाने वाले गोंद और केसर के मिश्रण से अनुच्छेदों को लिखा है। वर्तमान में तैयार की गई इस बुक में संविधान की प्रस्तावना, संघ और राज्य के अधिकार और नागरिकता से जुड़े पाठ शामिल हैं। यह उनके बड़े प्रोजेक्ट का पहला खंड है, जिसे पूरा करने में उन्हें लगभग 5 साल का समय लगा है।
हैरानी की बात यह है कि इरशाद अली अपने नियमित काम के बाद हर रोज 4 से 6 घंटे का समय इस कला को देते हैं। लिखने के बाद उन्होंने कानून के जानकारों से भी इसकी जांच कराई है ताकि कोई गलती न रहे। उनकी दिली ख्वाहिश है कि उनके द्वारा तैयार की गई यह अनोखी किताब भारतीय संसद के म्यूजियम में रखी जाए। उन्होंने यह भी इच्छा जताई है कि अगर उन्हें मौका मिले, तो वह खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह भेंट करना चाहेंगे।
इरशाद अली 1982 से ही कपड़े पर गंगा की मिट्टी से लिखने की इस अनूठी कला से जुड़े हुए हैं। उन्होंने सिर्फ संविधान ही नहीं, बल्कि हनुमान चालीसा, विष्णु सहस्त्रनाम, गीता और कुरान को भी कपड़े पर उकेरा है, जिसे पूरा करने में उन्हें 18 साल लगे। हिंदी, उर्दू और संस्कृत के जानकार इरशाद ने यह कला अपने पिता से सीखी है, जो आज बनारस की पहचान बन रही है।