कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के यौन उत्पीड़न मामले में बरी होने के बाद महिला पहलवानों और विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है। पहलवान विनेश फोगाट और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कोर्ट के फैसले पर अपनी बात रखी।
विनेश फोगाट ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि महिला पहलवानों को सड़क पर उतरकर आवाज उठाने और एक प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए काफी हिम्मत जुटानी पड़ी थी।
विनेश ने अपने पोस्ट में आरोप लगाया कि सत्ता और प्रभाव के चलते कई लड़कियों पर दबाव बनाया गया और उन्हें अपने बयान वापस लेने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद कुछ महिला पहलवान अपने आरोपों पर कायम रहीं और अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ती रहीं।
विनेश ने कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन हिंसा के आरोपों में दोषी नहीं माना। उन्होंने यह भी कहा कि महिला पहलवानों की लड़ाई सिर्फ एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि न्याय और सम्मान के लिए थी।
प्रियंका गांधी ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने महिला पहलवानों के संघर्ष का समर्थन करते हुए कहा कि खिलाड़ियों ने अपनी आवाज उठाने के लिए साहस दिखाया।
प्रियंका गांधी ने कहा कि महिला खिलाड़ियों को न्याय मिलना जरूरी है और ऐसी परिस्थितियों में पीड़ितों की बात को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने महिला सुरक्षा और सम्मान को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला 2023 में उस समय सुर्खियों में आया था, जब कई महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इसके बाद पहलवानों ने दिल्ली में प्रदर्शन किया और कार्रवाई की मांग की।
मामले की जांच के बाद अदालत में सुनवाई शुरू हुई। कोर्ट ने 10 मई 2024 को बृजभूषण शरण सिंह और उनके सहयोगी विनोद तोमर के खिलाफ आरोप तय किए थे। हालांकि, बाद में अदालत ने दोनों को मामले में बरी कर दिया।
फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज
कोर्ट के फैसले के बाद जहां बृजभूषण शरण सिंह ने इसे अपनी सच्चाई की जीत बताया, वहीं शिकायतकर्ता पक्ष और विपक्षी नेताओं ने फैसले पर निराशा जताई है।
यह मामला भारतीय खेल जगत में लंबे समय तक चर्चा का विषय रहा है। अब इस फैसले के बाद आगे की कानूनी और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर सभी की नजर बनी हुई है।