ग्लासगो। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में भारत को उस समय निराशा हाथ लगी जब महिला 77 किलोग्राम वर्ग में पदार्पण कर रहीं भारतीय वेटलिफ्टर संजना फाइनल की चुनौती पार नहीं कर सकीं। स्नैच स्पर्धा में तीनों प्रयास असफल रहने के कारण उनका अभियान शुरुआती चरण में ही समाप्त हो गया। भारत को इस वर्ग में पदक की उम्मीद थी, लेकिन तकनीकी त्रुटियों के चलते संजना प्रतियोगिता से बाहर हो गईं।
मुकाबले के दौरान संजना ने अपने पहले प्रयास से ही लय हासिल करने की कोशिश की, लेकिन बार को नियंत्रित करने में सफल नहीं हो सकीं। दूसरे प्रयास में भी वह संतुलन बनाए रखने में चूक गईं। अंतिम और निर्णायक प्रयास में उन्होंने अधिक वजन के साथ वापसी करने का प्रयास किया, लेकिन तकनीकी निष्पादन में कमी के कारण यह कोशिश भी सफल नहीं रही। तीनों प्रयास असफल रहने के बाद उन्हें प्रतियोगिता से बाहर होना पड़ा।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में केवल ताकत ही नहीं, बल्कि तकनीकी दक्षता और मानसिक संतुलन भी बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। कई बार अनुभवी खिलाड़ी भी दबाव में अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से चूक जाते हैं। संजना के लिए यह पहला कॉमनवेल्थ गेम्स था और भविष्य में इस अनुभव का उन्हें लाभ मिल सकता है।
हालांकि इस परिणाम से भारतीय दल को निराशा जरूर हुई है, लेकिन वेटलिफ्टिंग में भारत का कुल प्रदर्शन अब भी मजबूत बना हुआ है। अब तक भारतीय खिलाड़ियों ने इस खेल में कई पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है और यह प्रतियोगिता भारत के सबसे सफल खेलों में शामिल रही है। शेष भार वर्गों में भारतीय खिलाड़ियों से अभी भी पदकों की उम्मीद बरकरार है।
कोचिंग स्टाफ का कहना है कि संजना की तकनीकी कमियों का विश्लेषण किया जाएगा और आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए उन्हें बेहतर तैयारी कराई जाएगी। भारतीय खेल प्रेमियों को उम्मीद है कि युवा वेटलिफ्टर इस अनुभव से सीख लेकर भविष्य में दमदार वापसी करेंगी और बड़े मंच पर देश के लिए पदक जीतने में सफल होंगी।