आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते दायरे ने दुनिया भर के कामकाजी लोगों के बीच नौकरियों और करियर को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। कोडिंग, डेटा एनालिसिस और कंटेंट राइटिंग जैसे तकनीकी काम अब एआई आसानी से कर रहा है। लेकिन हाल ही में आई 'गो-ह्यूमानाइज़' (GoHumanize) की एक नई स्टडी के अनुसार, कुछ ऐसे मानवीय गुण और वर्कप्लेस स्किल्स (workplace skills) हैं, जिन्हें रिप्लेस करना (जगह लेना) एआई के लिए सबसे ज्यादा मुश्किल होगा।
इस स्टडी में 60 अलग-अलग प्रोफेशनल स्किल्स का बारीकी से अध्ययन किया गया। इसमें पाया गया कि जिन कामों में सामाजिक समझ, मानवीय भावनाएं, नैतिकता और तुरंत फैसले लेने की क्षमता की जरूरत होती है, वे भविष्य में भी पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।
एआई के लिए सबसे कठिन 5 इंसानी स्किल्स:
- 1. लीडरशिप (नेतृत्व क्षमता): यह सूची में सबसे ऊपर है। स्टडी के अनुसार, कंपनियों के सीईओ या सीनियर लीडर्स के कामों का केवल 31% हिस्सा ही ऑटोमेट (मशीनों द्वारा) किया जा सकता है। किसी विपरीत परिस्थिति को भांपना, टीम को प्रेरित करना और महत्वपूर्ण फैसले लेना पूरी तरह इंसानी समझ पर निर्भर है।
- 2. टीमवर्क और कलीग्स के साथ तालमेल: दूसरों के साथ मिलकर काम करना और वर्कप्लेस के माहौल को समझना मशीनों के बस की बात नहीं है। स्टडी में देखा गया कि करीब 40 लाख जॉब वैकेंसी में टीमवर्क को एक जरूरी योग्यता माना गया है। सहकर्मियों के बीच के अनकहे तनाव को समझना और आपसी भरोसा बनाना सिर्फ इंसान ही कर सकते हैं।
- 3. नेगोशिएशन (मोलतोल और बातचीत की कला): डील पक्की करने, बिजनेस पार्टनरशिप करने या मुद्दों को सुलझाने के लिए केवल डेटा काफी नहीं होता। इसके लिए अंतर्ज्ञान (intuition) और मनाने की कला की जरूरत होती है। स्टडी के मुताबिक, एआई नेगोशिएशन से जुड़े कामों को केवल 47% तक ही संभाल सकता है, बाकी के लिए इंसानी मौजूदगी जरूरी है।
- 4. कोचिंग और मेंटरशिप (मार्गदर्शन): शिक्षा, खेल या ह्यूमन रिसोर्स (HR) जैसे क्षेत्रों में किसी व्यक्ति के व्यवहार, उसकी भावनाओं और उसकी कमजोरियों को समझकर उसे गाइड करना होता है। स्टडी बताती है कि कोचिंग से जुड़े दो-तिहाई काम आज भी एआई की क्षमता से कोसों दूर हैं।
- 5. पब्लिक स्पीकिंग (मंच पर बोलना): अपनी बात को पूरे विश्वास, हाव-भाव और विश्वसनीयता के साथ लोगों के सामने रखना एआई के लिए बेहद मुश्किल है। पब्लिक स्पीकिंग में एआई के हावी होने की संभावना बेहद कम (74% रेजिस्टेंस) पाई गई है, क्योंकि लोग मशीनों के बजाय इंसानों की बातों पर ज्यादा भरोसा करते हैं।
डेटा एनालिसिस पर खतरा:
हैरानी की बात यह है कि डेटा एनालिसिस (Data Analysis), जिसकी आज मार्केट में बहुत मांग है, उसे एआई के लिए ऑटोमेट करना सबसे आसान माना गया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह पूरी तरह से नियमों और आंकड़ों पर आधारित काम है।
क्या है एक्सपर्ट्स की राय?
'गो-ह्यूमानाइज़' के फाउंडर का कहना है कि अब हमारी शिक्षा व्यवस्था में भी बदलाव की जरूरत है। केवल तकनीकी या रटने वाली स्किल्स सीखने के बजाय अब युवाओं को कम्युनिकेशन (बातचीत), सहानुभूति (empathy), लीडरशिप और सही समय पर सही निर्णय लेने जैसे गुणों को विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए। एआई के इस दौर में यही खूबियां भविष्य के रोजगार की गारंटी बनेंगी।