ढाका/नई दिल्ली। भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक स्तर पर एक नया मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। बांग्लादेश सरकार ने भारत के समक्ष यह अनुरोध रखा है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना यदि भारतीय भूमि से सार्वजनिक बयान देने की योजना बनाती हैं, तो उस पर उचित विचार किया जाए। ढाका का मानना है कि इस तरह की राजनीतिक गतिविधियां दोनों पड़ोसी देशों के बीच हाल के वर्षों में बने सकारात्मक माहौल को प्रभावित कर सकती हैं।
सूत्रों के अनुसार यह विषय ढाका में हुई उच्चस्तरीय बैठक के दौरान प्रमुखता से उठाया गया, जिसमें दोनों देशों के वरिष्ठ राजनयिकों ने भाग लिया। बातचीत का केंद्र उन मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया चर्चाओं पर रहा, जिनमें दावा किया गया कि शेख हसीना जल्द ही एक सार्वजनिक वर्चुअल संबोधन दे सकती हैं।
बांग्लादेशी प्रतिनिधियों ने अपने भारतीय समकक्षों से आग्रह किया कि किसी भी ऐसे मंच या गतिविधि पर ध्यान दिया जाए, जिससे बांग्लादेश की आंतरिक स्थिति प्रभावित होने की आशंका हो। उनका कहना था कि राजनीतिक रूप से संवेदनशील बयानों का असर केवल घरेलू हालात तक सीमित नहीं रहता, बल्कि द्विपक्षीय संबंधों पर भी पड़ सकता है।
बैठक के दौरान भारत की ओर से यह भरोसा दिलाया गया कि बांग्लादेश द्वारा उठाई गई चिंताओं को गंभीरता से देखा जाएगा और संबंधित विषय पर स्थापित कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं के अनुरूप निर्णय लिया जाएगा।
दोनों देशों के अधिकारियों ने इस अवसर पर व्यापार, सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और क्षेत्रीय सहयोग सहित अन्य द्विपक्षीय मुद्दों की भी समीक्षा की। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि नियमित संवाद और आपसी विश्वास के माध्यम से लंबित मामलों का समाधान निकाला जाना चाहिए।
गौरतलब है कि शेख हसीना पिछले वर्ष राजनीतिक घटनाक्रम के बाद भारत आई थीं और तब से यहीं रह रही हैं। इस बीच बांग्लादेश पहले भी उनके प्रत्यर्पण की मांग करता रहा है, जबकि भारत का कहना है कि ऐसे सभी अनुरोधों पर देश के कानूनों और स्थापित प्रक्रियाओं के अनुसार विचार किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद और तेज हो सकता है।