दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ते तापमान और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के बीच जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार, अल-नीनो (El Niño) और मानव गतिविधियों से बढ़ता कार्बन उत्सर्जन दोनों ही मौसम में हो रहे बदलावों के लिए जिम्मेदार हैं। भारत से लेकर यूरोप और अमेरिका तक कई देश इस समय भीषण गर्मी, हीटवेव और बदलते मौसम के प्रभावों का सामना कर रहे हैं।
इसी बीच अंतरराष्ट्रीय संस्था ऑक्सफैम (Oxfam) की एक रिपोर्ट ने बड़ी तेल और गैस कंपनियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) कंपनियों से होने वाला भारी कार्बन उत्सर्जन जलवायु संकट को बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल है।
तेल कंपनियों के मुनाफे पर उठे सवाल
ऑक्सफैम की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में जलवायु संकट गहराने के बावजूद कई बड़ी तेल और गैस कंपनियां अरबों डॉलर का मुनाफा कमा रही हैं। संगठन का कहना है कि एक ओर आम लोग गर्मी, सूखा, बाढ़ और तूफानों जैसी आपदाओं से प्रभावित हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जीवाश्म ईंधन कंपनियों की कमाई में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।
ऑक्सफैम का तर्क है कि जिन उद्योगों का कार्बन उत्सर्जन में बड़ा योगदान है, उन्हें जलवायु संकट से निपटने की जिम्मेदारी भी अधिक लेनी चाहिए।
ऑक्सफैम ने की अतिरिक्त टैक्स की मांग
ऑक्सफैम ने मांग की है कि बड़ी तेल कंपनियों के अतिरिक्त मुनाफे पर विशेष टैक्स लगाया जाए। संगठन के मुताबिक, इस टैक्स से मिलने वाले धन का इस्तेमाल जलवायु परिवर्तन से प्रभावित लोगों की सहायता, आपदा प्रबंधन और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में किया जाना चाहिए।
संस्था का कहना है कि जलवायु संकट का सबसे ज्यादा असर गरीब देशों और कमजोर समुदायों पर पड़ रहा है। इन वर्गों के पास गर्मी, सूखे और प्राकृतिक आपदाओं से बचने के लिए सीमित संसाधन होते हैं।
गरीब देशों पर बढ़ रहा जलवायु संकट का असर
जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया के कई हिस्सों में तापमान बढ़ रहा है। इसके परिणामस्वरूप:
- लंबे समय तक चलने वाली हीटवेव बढ़ रही हैं।
- सूखे की घटनाएं बढ़ रही हैं।
- कृषि उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
- बाढ़ और तूफानों से नुकसान बढ़ रहा है।
ऑक्सफैम का कहना है कि जलवायु संकट से निपटने के लिए केवल आम लोगों पर जिम्मेदारी डालना उचित नहीं है। बड़े प्रदूषणकारी उद्योगों को भी अपनी भूमिका निभानी होगी।
तेल कंपनियों का क्या कहना है?
तेल और गैस कंपनियां अक्सर यह तर्क देती रही हैं कि वे दुनिया की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) में भी निवेश कर रही हैं। कई कंपनियों ने कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं पर काम करने की योजनाएं भी घोषित की हैं।
हालांकि, पर्यावरण संगठनों का कहना है कि मौजूदा प्रयास पर्याप्त तेज नहीं हैं और जलवायु संकट की गंभीरता को देखते हुए बड़े स्तर पर बदलाव की जरूरत है।
जलवायु संकट पर बढ़ी वैश्विक बहस
बढ़ती गर्मी और चरम मौसम की घटनाओं के बीच जीवाश्म ईंधन उद्योग की भूमिका पर बहस तेज हो गई है। जहां कुछ विशेषज्ञ ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक जरूरतों को महत्वपूर्ण मानते हैं, वहीं पर्यावरण संगठन तेजी से स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों की जवाबदेही बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।