भारतीय सिनेमा को लगान, स्वदेश और जोधा अकबर जैसी यादगार फिल्में देने वाले आशुतोष गोवारिकर को लेकर एक बड़ी और दिलचस्प खबर सामने आई है। उन्हें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया के 57वें एडिशन का फेस्टिवल डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। यह वही मंच है जहां हर साल दुनिया भर की बेहतरीन फिल्मों का जश्न मनाया जाता है, और अब इसकी कमान एक ऐसे फिल्ममेकर के हाथ में है जो कहानियों को दिल से कहने के लिए जाने जाते हैं।
गोवारिकर ने इस पद पर शेखर कपूर की जगह ली है, जिन्होंने IFFI के 55वें और 56वें एडिशन की अगुवाई की थी। हर साल गोवा में आयोजित होने वाला यह फेस्टिवल सिर्फ फिल्मों का इवेंट नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक उत्सव बन चुका है। ऐसे में गोवारिकर की नियुक्ति को सिनेमा जगत में एक महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने अपने बयान में गोवारिकर के योगदान की जमकर सराहना की। मंत्रालय के अनुसार, उनका IFFI से जुड़ाव कई दशकों पुराना है, जो उनकी सिनेमाई समझ और अंतरराष्ट्रीय फिल्म संस्कृति के प्रति गहरी रुचि को दर्शाता है। यही अनुभव अब इस प्रतिष्ठित फेस्टिवल को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में काम आ सकता है।
खुद गोवारिकर ने भी इस नई जिम्मेदारी को लेकर उत्साह और गर्व जताया है। उन्होंने अपने सफर को याद करते हुए बताया कि 1984 से लेकर अब तक IFFI के साथ उनका रिश्ता खास रहा है। 1952 में शुरू हुआ यह फेस्टिवल आज एशिया के सबसे बड़े फिल्म समारोहों में गिना जाता है, और अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि गोवारिकर अपनी सोच और अनुभव से इसे किस नए मुकाम तक पहुंचाते हैं।