इस मुहिम के जरिए स्थानीय स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं, स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर, विद्यार्थियों की समस्याओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े दूसरे मुद्दों को सामने लाने की कोशिश की जाएगी। साथ ही संबंधित प्रशासन और अधिकारियों तक इन समस्याओं को पहुंचाकर उनके समाधान की मांग की जाएगी।
जंतर-मंतर आंदोलन के बाद नई मुहिम
अभिजीत दिपके की अगुवाई में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर आंदोलन किया गया था। इसके बाद अब ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के जरिए शिक्षा व्यवस्था के जमीनी मुद्दों को उठाने की तैयारी है।
अभियान का मुख्य फोकस उन स्कूलों पर रहेगा, जहां विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। मुहिम के जरिए बेहतर शैक्षणिक माहौल और छात्रों के लिए जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग उठाई जाएगी।
‘गांव के सरकारी स्कूल सबसे ज्यादा नजरअंदाज हुए’
दिपके ने सोमवार को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो संदेश जारी कर अभियान की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद के दशकों में अगर किसी क्षेत्र को सबसे ज्यादा नजरअंदाज किया गया है, तो वह गांवों के सरकारी स्कूल हैं।
उनका कहना है कि ग्रामीण इलाकों के बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं मिलना जरूरी है और स्कूलों की वास्तविक स्थिति को सामने लाने की जरूरत है।
हमीरपुर के बच्चों के प्रदर्शन का भी किया समर्थन
यह अभियान ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में चांदपुर गांव के सैकड़ों बच्चों और ग्रामीणों ने स्कूल तक पहुंचने के लिए बेहतर सड़क की मांग को लेकर जिला कलेक्ट्रेट तक मार्च किया था।
दिपके ने इस प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कहा कि बच्चे अपने भविष्य के लिए लड़ रहे हैं। उन्होंने बच्चों के आंदोलन को ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान से जोड़ते हुए उनका हौसला बढ़ाया।