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​नक्सलवाद के साये से निकलकर पहली बार शहर पहुंचे ग्रामीण: बनारस पुलिस ने पांडी गांव की महिलाओं को कराए बाबा विश्वनाथ के दर्शन, मॉल की 'चलती सीढ़ियों' ने चौंकाया

Photo Source : Google

Posted On:Tuesday, June 30, 2026

बनारस न्यूज डेस्क: उत्तर प्रदेश के नक्सल प्रभावित रहे चंदौली जिले के दूरदराज नौगढ़ ब्लॉक के पांडी गांव की महिलाओं और बच्चों के लिए सोमवार का दिन किसी सुनहरे सपने के सच होने जैसा रहा। अपने गांव के जंगलों से कभी बाहर न निकलने वाली इन महिलाओं और बच्चों ने पहली बार वाराणसी (बनारस) शहर की रौनक देखी। वाराणसी रेंज पुलिस की कम्युनिटी पुलिसिंग पहल और उत्तर प्रदेश सरकार के 'मिशन शक्ति' कार्यक्रम के तहत लगभग 50 ग्रामीणों को विशेष बस के जरिए वाराणसी के एक दिवसीय दौरे पर लाया गया। वाराणसी रेंज के डीआईजी वैभव कृष्ण के हालिया पांडी गांव दौरे के दौरान जब स्थानीय महिलाओं ने काशी विश्वनाथ के दर्शन और शहर देखने की इच्छा जताई थी, तो पुलिस प्रशासन ने इसे हकीकत में बदलने का जिम्मा उठाया।

​इस अनोखी और भावुक यात्रा के दौरान ग्रामीणों ने पहली बार अपने जीवन में चमचमाती शहरी जिंदगी और भीड़भाड़ वाले बाजारों को करीब से महसूस किया। बनारस पहुंचे इस दल ने सबसे पहले बाबा विश्वनाथ के दरबार में शीश नवाया और 'हर-हर महादेव' के गगनभेदी जयघोष के साथ पूरे मंदिर परिसर को गुंजायमान कर दिया। इसके बाद पुलिस टीम की सुरक्षा और देखरेख में ग्रामीणों को शक्तिपीठ विशालाक्षी देवी मंदिर, दुर्गा कुंड मंदिर और संकट मोचन हनुमान मंदिर के दर्शन कराए गए। जीवन में पहली बार काशी विश्वनाथ और बनारस के प्रसिद्ध मंदिरों में पूजा-अर्चना करने का अवसर पाकर विमला देवी, पुष्पा और कलावती जैसी ग्रामीण महिलाओं की आंखें खुशी और भक्ति से छलक उठीं।

​धार्मिक दर्शन के बाद जब पुलिस इन ग्रामीणों को शहर के प्रसिद्ध जेएचवी (JHV) मॉल लेकर गई, तो वहां का नजारा देखकर विशेषकर बच्चे और युवा अचंभे में पड़ गए। चमचमाती लाइटें, सेंट्रलाइज्ड एसी की ठंडी हवा और मॉल के भीतर लगी एस्केलेटर (स्वचालित सीढ़ियां) उनके लिए कौतूहल का सबसे बड़ा केंद्र बन गईं। ग्रामीण महिलाओं और बच्चों ने बेहद उत्साह और थोड़ी हिचकिचाहट के साथ इन "चलने वाली सीढ़ियों" पर कदम रखा और इस पल को हमेशा के लिए अपनी यादों में कैद कर लिया। 12वीं तक पढ़ीं पुनीता कुमारी और सुनीता जैसी युवा लड़कियों ने बताया कि उन्होंने जिंदगी में पहली बार मॉल देखा है और यह अनुभव उनके गांव की दुनिया से बिल्कुल अलग और जादुई है।

​डीआईजी वैभव कृष्ण ने इस अनूठी पहल के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य महिला सशक्तिकरण और बच्चों को प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के साये से बाहर निकलकर सामान्य हो चुके इस क्षेत्र के लोगों को शहरी विकास से रूबरू कराना जरूरी था, ताकि वे बेहतर भविष्य, उच्च शिक्षा और आर्थिक समृद्धि के बड़े सपने देख सकें। शाम को जब पुलिस टीम इस पूरे दल को सुरक्षित वापस उनके गांव छोड़ने जा रही थी, तब एक 12 वर्षीय मासूम बच्चे ने सुरक्षाकर्मियों से कहा, "मैं खूब पढ़ाई करूंगा और एक दिन फिर इस शहर में वापस आऊंगा।" यह सफर केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि जंगलों के बीच रहने वाले इन परिवारों के लिए नई संभावनाओं का पहला झरोखा साबित हुआ।


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