'द टेलीग्राफ' की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, खाड़ी देशों का मानना है कि हालिया क्षेत्रीय संघर्षों और जंग के रवैये के कारण वैश्विक पटल पर अमेरिका की विश्वसनीयता में भारी कमी आई है। अमेरिका के इसी रुख की वजह से ईरान के साथ लंबे समय से लंबित समझौतों पर ठीक से अमल नहीं हो पा रहा है। इस गतिरोध को तोड़ने के लिए कतर में अमेरिका और ईरान के बीच एक अहम बैठक प्रस्तावित है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच अस्थाई डील को पूरी तरह लागू करना है। हालांकि, असली बिसात इस बैठक के बाद बिछाई जाएगी।
रणनीति के मुताबिक, सऊदी अरब, कतर और ओमान की कोशिश अगस्त 2026 तक एक अंतिम और स्थायी समझौते तक पहुंचने की है। खाड़ी देशों का मुख्य एजेंडा फारस की खाड़ी में पूर्ण शांति स्थापित करना है ताकि उनका तेल व्यापार बिना किसी रुकावट के फल-फूल सके। इसके लिए वे ईरान की सख्त टोल शर्तों को भी स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। योजना के तहत एक ऐसा वित्तीय प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है जिससे ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों से टोल के रूप में सीधा राजस्व मिलेगा—एक ऐसा प्रावधान जिसे अमेरिका वर्तमान में मानने को बिल्कुल तैयार नहीं है। अमेरिका को इस पूरी प्रक्रिया से अलग रखकर खाड़ी देश भविष्य में समझौते के टूटने के जोखिम को हमेशा के लिए खत्म करना चाहते हैं।