बनारस न्यूज डेस्क: वाराणसी की राजनीति में हंसराज विश्वकर्मा का सफर एक समर्पित कार्यकर्ता से लेकर योगी सरकार में मंत्री पद तक पहुंचने की एक प्रेरणादायक कहानी है। वे भाजपा के उस कैडर-आधारित राजनीति का प्रतीक हैं, जहाँ जमीनी स्तर पर किए गए काम को पार्टी शीर्ष नेतृत्व द्वारा पहचाना और पुरस्कृत किया जाता है।
हंसराज विश्वकर्मा का राजनीतिक सफर और उपलब्धियां:
शुरुआत और निष्ठा: 1969 में कंचनपुर में जन्मे हंसराज विश्वकर्मा ने 1989 में भाजपा की सदस्यता ली। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक बूथ कार्यकर्ता के रूप में की, जो दर्शाता है कि उन्होंने संगठन की हर सीढ़ी को मेहनत से पार किया है।
संगठन में पकड़: 2006 में जिला कार्यकारिणी में शामिल होने के बाद, 2014 के लोकसभा चुनाव (जब पीएम मोदी वाराणसी से चुनाव लड़े) में उनकी सक्रियता ने सबका ध्यान खींचा। इसी का परिणाम रहा कि जनवरी 2016 में उन्हें वाराणसी जिला अध्यक्ष बनाया गया।
हैट्रिक और अटूट विश्वास: वह पिछले 10 वर्षों से लगातार तीसरी बार वाराणसी के जिलाध्यक्ष पद पर कार्यरत हैं। हाल ही में जब प्रदेश भर में अध्यक्ष बदले गए, तब भी पार्टी ने वाराणसी में उनके नेतृत्व पर ही भरोसा जताया।
संसदीय और सरकारी भूमिका: संगठन में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए पार्टी ने उन्हें 3 अप्रैल 2023 को एमएलसी (MLC) बनाया और अब उन्हें योगी सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सामाजिक और क्षेत्रीय प्रभाव:
पिछड़ा वर्ग का प्रमुख चेहरा: हंसराज विश्वकर्मा पूर्वांचल में विश्वकर्मा समाज के एक बड़े नेता माने जाते हैं। वह 'शिल्प अनुसंधान एवं विकास संस्थान उत्तर प्रदेश' और 'श्री विश्वकर्मा मंडल काशी' के संरक्षक के रूप में सामाजिक कार्यों में भी अग्रणी रहते हैं।
सक्रियता: गाजीपुर की घटना में पीड़ित परिवार की मदद के लिए पहुंचना उनकी संवेदनशीलता और समाज के प्रति उनकी जवाबदेही को दर्शाता है।
वाराणसी के लिए महत्व:
हंसराज विश्वकर्मा की मंत्री पद पर नियुक्ति से वाराणसी (काशी) का राजनीतिक कद सरकार में और बढ़ा है। यह न केवल कार्यकर्ताओं के लिए एक प्रेरणा है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि सरकार काशी के विकास और वहां के सांगठनिक ढांचे को कितनी प्राथमिकता दे रही है।