बनारस न्यूज डेस्क: वाराणसी में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर कई बड़े फैसले लिए हैं। रविवार देर शाम गंगा द्वार बंद कर दिया गया। अब श्रद्धालु गंगा द्वार के रास्ते श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन के लिए प्रवेश नहीं कर सकेंगे। वहीं सावन के दूसरे सोमवार से गंगा में चलने वाली छोटी-बड़ी 3 हजार से ज्यादा नावों पर भी रोक लगा दी गई है। फिलहाल सिर्फ क्रूज का संचालन जारी रहेगा।
जल पुलिस के मुताबिक गंगा का पानी करीब 2 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। ऐसे में नाव चलाना जोखिम भरा हो सकता है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए नावों के संचालन पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। पुलिस ने साफ किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
रविवार को गंगा का जलस्तर बढ़कर 63.78 मीटर पहुंच गया। यह चेतावनी बिंदु 70.24 मीटर से करीब 6.48 मीटर नीचे है। लगातार बढ़ते पानी के कारण घाटों की सीढ़ियां डूब गई हैं और नए-पुराने मिलाकर करीब 90 घाटों के बीच संपर्क टूट गया है। अब सीढ़ियों के रास्ते एक घाट से दूसरे घाट तक जाना संभव नहीं होगा।
गंगा का पानी ललिता घाट के ऊपर तक पहुंच गया है और श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के गंगा द्वार तक भी पानी पहुंच चुका है। वहीं दशाश्वमेध घाट के ऊपरी हिस्से में भी पानी आ गया है। इसके चलते श्रद्धालु अब घाट पर बैठकर गंगा आरती नहीं देख सकेंगे। जलस्तर बढ़ने के कारण आरती स्थल को पहले शनिवार को और फिर रविवार को करीब 5 फीट पीछे करना पड़ा।
उधर, मणिकर्णिका घाट तक भी गंगा का पानी पहुंच गया है। अगर जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो शवदाह स्थल को दूसरी जगह स्थानांतरित करना पड़ सकता है। लगातार बढ़ता जलस्तर अब प्रशासन के साथ घाटों पर आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की चिंता भी बढ़ा रहा है।