बनारस न्यूज डेस्क: काशी में रविवार की रात आस्था, इतिहास और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। सूर्य सरोवर मैदान बरेका में आयोजित तीन दिवसीय सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का भव्य समापन हुआ। इस आयोजन में करीब 60 हजार लोगों ने हिस्सा लिया और ‘जय महाकाल’ व ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा।
समापन समारोह में उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने अपने संबोधन में सम्राट विक्रमादित्य को भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के बाद जन-जन के नायक के रूप में बताया। साथ ही विक्रम संवत की स्थापना को भारत की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक बताया और काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ को सांस्कृतिक जुड़ाव का माध्यम बताया।
समापन की शाम उज्जैन की संस्था ‘विशाला’ के कलाकारों ने त्रि-आयामी मंच पर सम्राट विक्रमादित्य के जीवन, पराक्रम और न्याय की गाथा को जीवंत कर दिया। सैकड़ों कलाकारों की प्रस्तुति, युद्ध के दृश्य और सशक्त संवादों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
निर्देशक संजीव मालवीय के निर्देशन में ‘सिंहासन बत्तीसी’ सहित कई ऐतिहासिक प्रसंगों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। साथ ही आयोजन स्थल पर ‘भारतीय ज्ञान परंपरा’ पर आधारित प्रदर्शनी भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी, जिसमें सम्राट विक्रमादित्य और अयोध्या के ऐतिहासिक संबंधों को दर्शाया गया।
इस दौरान उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच ‘गंगा से नर्मदा’ थीम पर एक अहम समझौता भी हुआ, जिससे काशी और उज्जैन के बीच धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है। वीआर तकनीक के जरिए दर्शकों ने ओरछा, सांची और खजुराहो जैसे प्रमुख स्थलों का वर्चुअल अनुभव भी लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत में मध्य प्रदेश के लोक कलाकारों ने मटकी नृत्य, गणगौर और डमरू दल की प्रस्तुतियों से माहौल को उत्सव में बदल दिया। अंत में ‘जय महाकाल’ और ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष के साथ इस भव्य आयोजन का समापन हुआ, जिसने दोनों धार्मिक नगरीयों के रिश्ते को और मजबूत बना दिया।