बनारस न्यूज डेस्क: वाराणसी के लाट भैरव मंदिर परिसर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें दो महिलाओं को भोजपुरी गानों पर डांस करते हुए दिखाया गया। वीडियो में कुछ पुलिसकर्मी भी कथित तौर पर मंच के आसपास नजर आ रहे थे। इसे लेकर सोशल मीडिया पर पुलिस की मौजूदगी और उनके कथित व्यवहार पर सवाल उठने लगे। हालांकि, वाराणसी पुलिस ने मंगलवार को साफ किया कि वायरल वीडियो असली नहीं, बल्कि एआई से बनाया गया है।
काशी जोन के डीसीपी गौरव बंसवाल ने बताया कि पुलिस ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों की ओर से बनाए गए वीडियो की जांच की। वायरल क्लिप में दिखाई दे रहे पुलिसकर्मी इन वीडियो में कहीं नजर नहीं आए। पुलिस का कहना है कि वीडियो को पुलिस की छवि खराब करने के इरादे से फैलाया गया। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, आदमपुर थाने में वीडियो फैलाने वाले अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया है।
यह वीडियो 23 से 27 सितंबर तक चले पांच दिवसीय बाबा लाट भैरव बारात उत्सव से जोड़ा गया था। यह आयोजन बाबा लाट भैरव यानी कपाल भैरव और देवी भैरवी के विवाह की परंपरा से जुड़ा है। कार्यक्रम के दौरान कज्जाकपुरा स्थित मुख्य मंदिर से श्रद्धालु विवाह सामग्री लेकर निकलते हैं और विशालेश्वरगंज सब्जी मंडी में तिलक की रस्म होती है। इसके बाद जुलूस काल भैरव मंदिर पहुंचता है, जहां पूजा और आरती के बाद लाट भैरव मंदिर में आयोजन पूरा होता है।
मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि इस उत्सव में नगर वधुओं के डांस की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। हालांकि, सनातन रक्षक दल के अध्यक्ष अजय शर्मा ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी प्रस्तुतियां पिछले कुछ वर्षों में ही शुरू हुई हैं। वहीं, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पूर्व महासचिव और अधिवक्ता विकास सिंह ने वायरल वीडियो में पुलिसकर्मियों के कथित व्यवहार को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग की थी। फिलहाल पुलिस की जांच का मुख्य केंद्र वीडियो को एआई से तैयार कर वायरल करने वालों की पहचान करना है।